विशेष रिपोर्ट : बिलासपुर के पोंडी में ‘जाति’ की लूट! धीवर समाज ने ‘बैगा’ बनकर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों का हक मारा…

बिलासपुर। जिले से एक ऐसे संगठित ‘जाति घोटाले’ का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक तंत्र और सामाजिक न्याय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत पोंडी (थाना सीपत) में ओबीसी (धीवर/ढीमर) जाति के सैकड़ों लोगों द्वारा फर्जी तरीके से बैगा जनजाति (PVTG) का प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियां हथियाने और आदिवासी अधिकारों की डकैती करने का मामला गरमा गया है।

SIT और CBI जांच की मांग : ‘मास्टरमाइंड’ ने खड़ा किया साम्राज्य – शिकायतकर्ताओं ने इसे भारत का सबसे बड़ा जाति घोटाला बताते हुए SIT या CBI जांच की मांग की है। आरोप है कि ग्राम पोंडी के चार प्रमुख व्यक्ति—कांसीराम, शेवकराम, राधेश्याम और धनश्याम (सभी पिता धीवर)—इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड हैं। इन लोगों ने न केवल स्वयं रेंजर और शिक्षक जैसे उच्च पदों पर नौकरियां प्राप्त कीं, बल्कि फर्जीवाड़े के दम पर अकूत संपत्ति भी अर्जित की है, जिसे कुर्क करने की मांग की गई है।
धोखाधड़ी का ‘मॉडस ऑपरेंडी’ (तरीका) – दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर इस फर्जीवाड़े की परतें बेहद चौंकाने वाली हैं :
- दस्तावेजों में हेराफेरी : स्कूल के दाखिल-खारिज और सरकारी रिकॉर्ड में धीवर के बजाय बैगा अंकित कराया जा रहा है।
- नाम में ‘जगत’ का सहारा : पकड़े जाने के डर से नई पीढ़ी अब ‘बैगा’ के बजाय ‘जगत’ उपनाम का उपयोग कर रही है। उदाहरण के तौर पर, एमबीबीएस (MBBS) में चयन के लिए इसी कोटे का उपयोग किया गया है।
- पंचायत चुनाव में सेंध : पोंडी के निवासी की पुत्री ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर पेंडरवा (लखनपुर) में ST आरक्षित सीट से सरपंच का चुनाव जीता है।
- तहसील बदल कर खेल : पहले यह फर्जीवाड़ा बिलासपुर से होता था, लेकिन अब पेंड्रा, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की तहसीलों से प्रमाण पत्र जारी कराने का नया खेल शुरू हुआ है।
असली बैगा समाज का दर्द : “हमारा इनसे कोई नाता नहीं” – नांगा बैगा जन शक्ति संगठन ने राज्यपाल को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि पोंडी में एक भी असली बैगा परिवार नहीं रहता। संगठन के अध्यक्ष राम सिंह बैगा के अनुसार, इन फर्जी लोगों की संस्कृति, बोली और खान-पान असली बैगाओं से बिल्कुल अलग है। इनका सामाजिक रिश्ता (रोटी-बेटी) भी धीवर समाज में ही है, लेकिन कागजों पर ये ‘बैगा’ बन बैठे हैं।
प्रशासनिक मिलीभगत और धमकाने का आरोप : शिकायत में यह भी उल्लेख है कि जब भी इन पर आरटीआई (RTI) लगाई जाती है, तो उच्च कार्यालयों के बाबू और अधिकारी दोषियों को बचाने के लिए जानकारी नहीं देते। इसके अलावा, जानकारी मांगने वालों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे गांव में डर का माहौल है।
प्रमुख मांगें :
- ग्राम पोंडी के समस्त सरकारी रिकॉर्ड की 1929-30 के मिशल अभिलेखों के आधार पर जांच हो।
- फर्जी प्रमाण पत्र धारकों को तत्काल बर्खास्त कर उनसे वेतन की रिकवरी की जाए।
- आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर लिस्ट में सुधार के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।
- फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर उन्हें सेवा से बाहर किया जाए।
चेतावनी : शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन इस पर कड़ी कार्यवाही नहीं करता, तो कलेक्ट्रेट बिलासपुर का घेराव कर राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।




