बिलासपुर : नोवा स्पंज आयरन प्लांट में मौत का तांडव, फर्नेस फटा या पिघला लोहा छलका? 4 मजदूर बुरी तरह झुलसे…

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। न्यायधानी के औद्योगिक क्षेत्र बिल्हा में मंगलवार की रात एक भयानक चीख-पुकार में बदल गई। ग्राम भैंसबोड़ स्थित नोवा स्पंज एंड आयरन प्लांट के फर्नेस सेक्शन में काम के दौरान ‘मोल्टन मेटल’ (पिघला हुआ लोहा) गिरने से चार मजदूर जिंदा जलने से बाल-बाल बचे। वर्तमान में चारों की स्थिति नाजुक बनी हुई है और वे शहर के एक निजी अस्पताल के बर्न यूनिट में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
घटनाक्रम: रात 1 बजे का वो खौफनाक मंजर : मंगलवार रात जब पूरा शहर सो रहा था, तब नोवा प्लांट में नाइट शिफ्ट का काम जोरों पर था। रात करीब 1:00 बजे शिफ्ट चेंज होने के बाद मजदूर अपने काम पर लौटे ही थे।
- कैसे हुआ हादसा : फर्नेस से धधकते हुए पिघले लोहे को ‘लैडर’ (एक विशाल कंटेनर) में पलटा जा रहा था। इसी दौरान तकनीकी खराबी या प्रेशर बढ़ने के कारण खौलता हुआ लावा (करीब 1500°C से अधिक तापमान) छलक कर सीधे नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर गया।
- मजदूरों की स्थिति : लोहे की भीषण तपिश इतनी तेज थी कि मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आग की लपटों और पिघले धातु की चपेट में आने से चारों मजदूर वहीं जमीन पर गिरकर छटपटाने लगे।
घायलों का विवरण और स्वास्थ्य स्थिति : हादसे में घायल हुए मजदूरों में स्थानीय और प्रवासी दोनों श्रमिक शामिल हैं :
- नरेंद्र कोसले (निवासी: ग्राम भैंसबोड़, बिल्हा)
- चंद्रहास (निवासी: ग्राम भैंसबोड़, बिल्हा)
- धर्मवीर (निवासी: बिहार)
- विनय कुमार (निवासी: बिहार)
मेडिकल रिपोर्ट : डॉक्टरों के अनुसार, चारों मजदूर 25% से 40% तक झुलस चुके हैं। सबसे ज्यादा खतरा शरीर के ऊपरी हिस्सों और श्वसन नली (Inhalation injury) को लेकर है, क्योंकि गर्म वाष्प फेफड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है।
प्रबंधन की भूमिका और रेस्क्यू ऑपरेशन : हैरानी की बात यह रही कि हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस की सुविधा मिलने में देरी हुई। मौके पर मौजूद अन्य श्रमिकों ने साहस दिखाया और प्लांट के ही एक अधिकारी की कार का उपयोग कर घायलों को बिलासपुर के पुष्कर भारद्वाज प्रताप चौक स्थित निजी अस्पताल पहुँचाया।
बड़ा सवाल : क्या प्लांट में आपातकालीन स्थिति के लिए एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था नहीं थी?
जांच के घेरे में ‘सुरक्षा मानक’ : बिल्हा पुलिस और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (Directorate of Industrial Health and Safety) ने मामले की फाइल खोल दी है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:
- सेफ्टी गियर : क्या मजदूरों ने ‘हीट रेजिस्टेंट’ सूट, हेलमेट और दस्ताने पहने थे?
- तकनीकी ऑडिट : क्या फर्नेस और लैडर की नियमित जांच (Maintenance) की गई थी?
- ओवरटाइम का दबाव : क्या मजदूर थकान की स्थिति में काम कर रहे थे?
क्षेत्र में आक्रोश : स्थानीय ग्रामीणों और श्रमिक संगठनों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। आए दिन होने वाले इन हादसों ने औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पुलिस अब प्लांट के सीसीटीवी फुटेज और शिफ्ट इंचार्ज के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।




