महा-खुलासा : जशपुर का ‘खसरा-तंत्र’ – आयुष अग्रवाल का बेनामी साम्राज्य और ‘मुखौटा’ नरेश सिदार!…

भाग -6
जशपुर। जिले के पत्थलगांव में आदिवासी जमीनों की ‘जादूगरी’ और बेनामी संपत्ति का एक ऐसा सनसनीखेज सिंडिकेट सामने आया है, जिसने शासन के कड़े नियमों को कागज की रद्दी साबित कर दिया है। स्वतंत्र पत्रकार की शिकायत और एक सीक्रेट ऑडियो कॉल ने उस पर्दे को हटा दिया है जिसके पीछे आयुष अग्रवाल असली ‘खिलाड़ी’ बनकर बैठा है।
बेनामी का खेल : चेहरा नरेश, तिजोरी आयुष की! – दस्तावेजों और ऑडियो कॉल से साफ संकेत मिलता है कि पत्थलगांव का आयुष अग्रवाल पर्दे के पीछे रहकर जमीनों के बड़े सौदों का संचालन कर रहा है। ऑडियो में आयुष न केवल जमीनों के रेट तय कर रहा है, बल्कि लुड़ेग रोड जैसी प्राइम लोकेशन पर 5-10 एकड़ जमीन के लिए रायपुर की बड़ी पार्टियों को साधने की बात कर रहा है।
यह सीधे तौर पर बेनामी संपत्ति (निषेध) अधिनियम के उल्लंघन की ओर इशारा करता है, जहां पैसा किसी और का है और नाम किसी ‘मुखौटे’ का। इस खेल में ‘मुखौटा’ बनाया गया है नरेश कुमार सिदार को, जिसके नाम पर जमीनों की ‘सेंचुरी’ बना दी गई है।
नरेश सिदार : एक ‘जातीय गिरगिट’ या सोची-समझी स्क्रिप्ट? – सिंडिकेट की चालाकी देखिए – नरेश कुमार सिदार सरकारी दस्तावेजों में अपनी जाति बदलने में माहिर है :
- ग्राम पालीडीह के रिकॉर्ड में वह ‘गोंड’ जनजाति का है।
- पत्थलगांव खसरा 513/85/ख में वह रातों-रात ‘उरांव’ बन जाता है।
यह केवल ‘प्रशासनिक चूक’ नहीं, बल्कि आदिवासी जमीनों के हस्तांतरण संबंधी नियमों को ‘बाईपास’ करने के लिए रचा गया एक आपराधिक षड्यंत्र प्रतीत होता है।
HDFC बैंक का ‘असीम प्रेम’ और करोड़ों का ‘मॉर्टगेज’ खेल – बेनामी संपत्ति के इस साम्राज्य को वित्तीय मजबूती देने के लिए 28 अगस्त 2025 को एक ‘महा-मुहूर्त’ निकाला गया। इसी एक दिन में नरेश सिदार ने अपनी अधिकांश व्यावसायिक रूप से डायवर्टेड (वाणिज्यिक) जमीनें HDFC BANK, रायगढ़ में बंधक रख दीं।
- खसरा नंबर 513/24/ख, 513/24/ग, 513/24/3 जैसे दर्जनों प्लॉट एक ही दिन में बंधक रखे गए।
- आशंका है कि इन जमीनों पर करोड़ों का ऋण लेकर उस पैसे को आयुष अग्रवाल के सिंडिकेट में खपाया गया है।
पीएमओ (PMO) की रडार पर ‘जशपुर का माफिया’ – पत्रकार ने इस पूरे ‘खसरा-तंत्र’ के सबूत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सौंप दिए हैं (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2026/0007354)। मामला फिलहाल छत्तीसगढ़ शासन के लोक शिकायत निवारण विभाग में ‘Under Process’ है।
मुख्य मांगें:
- आयुष अग्रवाल और उसके ‘रायपुर कनेक्शन’ की बेनामी संपत्ति कानून के तहत जांच हो।
- नरेश सिदार की बदलती जातियों और अवैध डायवर्जन पर FIR दर्ज की जाए।
- HDFC बैंक में एक ही दिन में किए गए करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन की वित्तीय जांच (Audit) हो।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘अजब-गजब’ गठजोड़ पर कब बुलडोजर चलाता है या फिर फाइलें रसूख के रद्दीखाने में डाल दी जाती हैं।
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