‘हर फाइल के पीछे एक ज़िंदगी’: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायिक तंत्र को याद दिलाई उसकी जिम्मेदारी…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्याय व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को एक अत्यंत मानवीय और संवेदनशील संदेश दिया है। बिलासपुर स्थित विवेकानंद सभागार में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्होंने दो-टूक कहा कि “न्यायालय में आने वाला हर मामला महज एक कागज की फाइल नहीं, बल्कि एक इंसान की ज़िंदगी और उसकी कहानी होती है।”
मुख्य न्यायाधीश रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा FTC (फास्ट ट्रैक कोर्ट) और FTSC न्यायाधीशों, लोक अभियोजकों और जांच अधिकारियों के लिए आयोजित राज्य स्तरीय न्यायिक संवाद को संबोधित कर रहे थे।
न्याय का मंत्र : ईमानदारी, कुशलता और संवेदनशीलता – मुख्य न्यायाधीश ने न्याय वितरण प्रणाली के सभी स्तंभों को उनकी मौलिक जिम्मेदारी याद दिलाई। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
- संवेदनशील न्याय : पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामलों में कानून की सफलता केवल किताबी ज्ञान पर नहीं, बल्कि उसकी ‘मानवीय और उद्देश्यपरक’ व्याख्या पर टिकी है।
- संतुलन की आवश्यकता : न्यायिक अधिकारियों को आदेश देते समय ‘कानूनी कठोरता’ और ‘मानवीय सहानुभूति’ के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा।
- सुरक्षित वातावरण : न्यायालयों को पीड़ितों के लिए डरावनी जगह के बजाय एक सुरक्षित और सम्मानजनक स्थान के रूप में विकसित करना अनिवार्य है।
जांच और अभियोजन पर सख्त टिप्पणी : मुख्य न्यायाधीश ने जांच अधिकारियों (IO) और अभियोजकों को चेतावनी देते हुए कहा कि “त्रुटिपूर्ण विवेचना न्याय की हत्या के समान है।”
”साक्ष्यों का दमन करना या अतिउत्साह में तर्क देना न केवल अभियोजन को कमजोर करता है, बल्कि न्याय प्रणाली से आम जनता का भरोसा भी उठा देता है। एक अभियोजक का काम केवल सजा दिलाना नहीं, बल्कि न्यायालय को सत्य तक पहुँचने में मदद करना है।”
प्रशिक्षण के मुख्य विषय : राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में तीन अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- मानव तस्करी निरोध : पीड़ितों के पुनर्वास और अपराधियों को सजा।
- पॉक्सो एक्ट : बच्चों के प्रति अपराधों में त्वरित और बाल-मित्र न्याय।
- डिजिटल न्याय : ई-साक्ष्य, ई-समन और ‘न्याय श्रुति’ जैसे आधुनिक तकनीकी माध्यमों का प्रभावी उपयोग।
गरिमामयी उपस्थिति : इस विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण – प्रतीम साहू, नरेश कुमार चंद्रवंशी, सचिन सिंह राजपूत समेत कई अन्य न्यायाधीश उपस्थित रहे। वक्ता के रूप में न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी (पूर्व न्यायाधीश) और पुलिस महानिरीक्षक ध्रुव गुप्ता ने भी अपने अनुभव साझा किए।




