धमतरी में सनसनी : वाटर टैंक से कूदकर 17 वर्षीय रागिनी ने दी जान, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल…

धमतरी। शहर में रविवार की शाम उस वक्त मातम और सनसनी में बदल गई, जब सुभाषनगर वार्ड स्थित ओवरहेड वाटर टैंक से एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान रानू उर्फ रागिनी श्रीवास्तव के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती फोन पर बात करते हुए ऊपर चढ़ी थी और पलक झपकते ही यह खौफनाक कदम उठा लिया।
घटनाक्रम : मौत की लाइव गवाह बनी भीड़ – रविवार की शाम जब लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी रागिनी को पानी टंकी की सीढ़ियों पर चढ़ते देखा गया। बताया जा रहा है कि वह मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी। जब तक नीचे खड़े लोग कुछ समझ पाते या उसे रोकने की कोशिश करते, रागिनी ने टंकी की ऊंचाई से छलांग लगा दी। जमीन पर गिरते ही वह लहूलुहान हो गई और गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिसिया कार्रवाई और जांच : सूचना मिलते ही सीएसपी अभिषेक चतुर्वेदी और कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा।
- मोबाइल कॉल डिटेल : पुलिस रागिनी के मोबाइल फोन को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि वह आखिरी समय में किससे बात कर रही थी।
- जांच का केंद्र : पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह प्रेम प्रसंग का मामला है, पारिवारिक तनाव है या फिर कोई और वजह। फिलहाल सुसाइड नोट मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन की लापरवाही : ‘डेथ ट्रैप’ बनी पानी टंकी? – इस दुखद घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
- खुली चुनौती : स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस टंकी पर पहले भी कई लोग जान देने की नीयत से चढ़ चुके हैं।
- सुरक्षा नदारद : बार-बार की चेतावनी और पिछली घटनाओं के बावजूद निगम ने टंकी की सीढ़ियों पर कोई सुरक्षा घेरा (Grill) या ताला लगाने की व्यवस्था नहीं की थी।
- जन आक्रोश : क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सीढ़ियों को प्रतिबंधित किया गया होता, तो आज एक मासूम की जान बच सकती थी।
“युवती मोबाइल पर बात करते हुए टंकी पर चढ़ी थी। आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच के बाद ही होगा। हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है।”
अभिषेक चतुर्वेदी, सीएसपी, धमतरी
रागिनी की मौत ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और किशोरों पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा किया है। साथ ही, यह नगर निगम के लिए भी एक ‘वेक-अप कॉल’ है कि वे सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


