बिल्हा SBI गबन कांड : ₹2.06 करोड़ की ‘डिजिटल डकैती’ करने वाली फरार कैशियर गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई…

बिलासपुर। बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और भरोसे में सेंध लगाने वाली एक बड़ी जालसाजी का अंत हो गया है। बिल्हा स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा में हुए 2 करोड़ 6 लाख 37 हजार रुपए के भारी-भरकम गबन मामले में मुख्य आरोपी और निलंबित कैशियर तेजवथी थिरापतम्मा को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार कर लिया है। FIR दर्ज होने के बाद से ही आरोपी महिला पुलिस को चकमा देकर फरार चल रही थी।
कैसे खुला करोड़ों का यह ‘ब्लैक होल’? – यह मामला साल 2025 में तब प्रकाश में आया, जब बिल्हा शाखा के खातों के मिलान के दौरान करोड़ों रुपए का अंतर पाया गया। शाखा प्रबंधक पीयूष बारा ने जब आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) कराया, तो होश उड़ाने वाले तथ्य सामने आए:
- रिकॉर्ड में हेरफेर : कैशियर तेजवथी ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम और फिजिकल रिकॉर्ड्स में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की थी।
- खातों से छेड़छाड़ : ग्राहकों के खातों और बैंक के आंतरिक खातों के डेटा को इस तरह बदला गया कि गबन की गई राशि का तुरंत पता न चल सके।
- सुनियोजित साजिश : जांच में पाया गया कि यह कोई मानवीय भूल नहीं, बल्कि ₹2,06,37,000 की सुनियोजित चोरी थी।
निलंबन और फरारी का घटनाक्रम : जून 2025 में बैंक मुख्यालय के निर्देश पर तेजवथी थिरापतम्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
- जगदलपुर अटैचमेंट : निलंबन के बाद उसे क्षेत्रीय व्यावसायिक कार्यालय (RBO) जगदलपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी।
- गायब हुई आरोपी : आरोपी कैशियर न तो जगदलपुर पहुंची और न ही बिल्हा कार्यालय में उसने कोई संपर्क किया।
- एसीबी की एंट्री : मामले की गंभीरता और बड़ी राशि को देखते हुए इसकी जांच एसीबी को सौंपी गई। एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी ‘अंडरग्राउंड’ हो गई।
एसीबी का शिकंजा और गिरफ्तारी : लंबे समय से फरार चल रही तेजवथी की तलाश में एसीबी की टीमें लगातार छापेमारी कर रही थीं। तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना के आधार पर आखिरकार उसे दबोच लिया गया। अब एसीबी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गबन की गई यह विशाल राशि कहां ठिकाने लगाई गई है और क्या इस खेल में बैंक के कुछ और ‘बड़े खिलाड़ी’ शामिल थे।




