रायगढ़

वनांचल में विकास की नई इबारत : रायगढ़ कलेक्टर ने ₹3.50 करोड़ की सौगातों से संवारा पुरुंगा और छाल का भविष्य…

रायगढ़। जिले के सुदूर वनांचल और खनिज उत्खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के कायाकल्प की मुहिम तेज हो गई है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने धरमजयगढ़ विकासखंड के दुर्गम क्षेत्रों का सघन दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे को मजबूती देने वाले कई बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास किया। जिले के पुरुंगा और छाल जैसे वनांचल गांवों को अब आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक केंद्रों की सौगात मिल गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी छलांग : पुरुंगा उप-स्वास्थ्य केंद्र तैयार – ​खनिज प्रभावित ग्राम पुरुंगा में 28.51 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित उप-स्वास्थ्य केंद्र भवन बनकर पूरी तरह तैयार है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इसी माह स्वास्थ्य केंद्र को नए भवन में शिफ्ट किया जाए।

  • उद्देश्य : वनांचल के ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए शहर की ओर न भटकना पड़े।
  • सुविधाएं : भवन को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुसज्जित करने और सभी आवश्यक दवाइयां व चिकित्सा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सामाजिक सरोकार का केंद्र : छाल में ₹50 लाख का सामुदायिक भवन – ​मुख्यमंत्री घोषणा की पूर्ति योजना के तहत ग्राम पंचायत छाल में 50 लाख रुपए की लागत से एक भव्य और सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

  • बहुउद्देशीय उपयोग : यह भवन क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और सामूहिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र बनेगा।
  • आय संवर्धन मॉडल : कलेक्टर ने भवन परिसर में व्यवसायिक परिसर निर्माण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं, जिससे पंचायत की आय बढ़ सके। साथ ही, सामने स्थित मैदान के समतलीकरण और सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है ताकि इसे एक ‘एक्टिविटी हब’ के रूप में विकसित किया जा सके।

शिक्षा के ढांचे में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : ₹3.20 करोड़ से बनेंगे दो कन्या छात्रावास – ​खनिज प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा के गिरते स्तर और जर्जर अधोसंरचना को देखते हुए कलेक्टर ने एक बड़ा निर्णय लिया है। पुरुंगा और खड़गांव में स्थित पुराने आदिवासी कन्या छात्रावासों की जर्जर स्थिति को देखते हुए उनके स्थान पर नवीन भवनों के निर्माण की घोषणा की गई है।

  • लागत : डीएमएफ (DMF) मद से प्रत्येक छात्रावास के लिए लगभग 1.60 करोड़ रुपए (कुल ₹3.20 करोड़) की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
  • आधुनिक सुविधाएं : इन छात्रावासों में केवल रहने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि लाइब्रेरी, खेल सामग्री और बौद्धिक विकास के लिए पत्र-पत्रिकाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
  • सुरक्षा सर्वोपरि : नए भवन बनने तक छात्राओं को सुरक्षित वैकल्पिक भवनों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्राउंड जीरो पर संवाद : ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निपटारा – ​दौरे के दौरान कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने न केवल भवनों का निरीक्षण किया, बल्कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी किया।

  • प्राथमिकता : कलेक्टर ने साफ किया कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, पीडीएस (PDS), आंगनबाड़ी और स्कूल व्यवस्था जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
  • भरोसा : ग्रामीणों द्वारा रखी गई मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का आश्वासन देते हुए उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत की भी समीक्षा की।

अधिकारियों की मौजूदगी : निरीक्षण के दौरान धरमजयगढ़ एसडीएम श्री प्रवीण भगत, कृषि एसडीओ प्रभास शंकर सिंह, तहसीलदार लोमस मिरी, जनपद सीईओ, छाल सरपंच श्रीमती मालती राठिया एवं स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कलेक्टर का विजन : “हमारा लक्ष्य वनांचल के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। बुनियादी ढांचे के साथ-साथ हम इन क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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