रायगढ़ : तमनार वन परिक्षेत्र में हाथी शावक की मौत, वन विभाग में हड़कंप ; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल…

रायगढ़। जिले में हाथियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। जिले के तमनार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत एक नन्हे हाथी (शावक) का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और इलाके को सील कर दिया है।
घटना का विवरण और शुरुआती जाँच : ग्रामीणों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद वन विभाग के उच्च अधिकारी और डॉक्टरों की टीम घटनास्थल पर पहुँची। प्रारंभिक निरीक्षण के बाद शावक के शव को कब्जे में ले लिया गया है।
- पोस्टमार्टम : मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया है।
- संभावित कारण : हालांकि रिपोर्ट आनी बाकी है, लेकिन विभाग इस बात की जाँच कर रहा है कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, आपसी संघर्ष में या फिर इसके पीछे कोई अन्य बाहरी कारण (जैसे करंट या संक्रमण) तो नहीं है।
- निगरानी : घटना स्थल के आसपास के क्षेत्र में हाथियों के दल की मौजूदगी को देखते हुए ‘एलिफेंट ट्रैकर’ तैनात कर दिए गए हैं।
बढ़ता मृत्यु दर : एक गंभीर चुनौती : पिछले कुछ समय में रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में हाथी शावकों की मृत्यु की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब एक तरफ जिले में हाथियों की संख्या और जन्म दर बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
प्रमुख चुनौतियाँ :
- झुंड की सघनता : हाथियों की बढ़ती संख्या के कारण उनके बीच संसाधनों और क्षेत्र को लेकर संघर्ष बढ़ सकता है।
- मानव-हाथी द्वंद्व : भोजन की तलाश में हाथी अक्सर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करते हैं, जिससे शावकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।
- निगरानी का अभाव : घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण हर एक शावक की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करना चुनौतीपूर्ण है।
वन विभाग की सक्रियता और जन-जागरूकता : वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर ड्रोन और सैटेलाइट ट्रैकिंग (जहाँ संभव हो) के माध्यम से नजर रखी जा रही है। साथ ही, तमनार और आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
”हम शावक की मौत के कारणों की गहराई से जांच कर रहे हैं। स्थानीय लोगों से अपील है कि वे हाथियों के दल के करीब न जाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन अमले को दें।” – वन विभाग अधिकारी
अगले कदम : भविष्य की योजना – विभाग अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अपनी आगामी रणनीति तैयार करेगा। यदि मौत किसी संक्रामक बीमारी की वजह से हुई है, तो पूरे झुंड के स्वास्थ्य परीक्षण की योजना बनाई जा सकती है।




