मर्जी से साथ जाना और संबंध बनाना ‘रेप’ नहीं : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहमति और कानून की मर्यादाओं पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें एक आरोपी को दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों से बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई है और उनके बीच संबंध बने हैं, तो इसे रेप या अपहरण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
मामला क्या था? – गरियाबंद जिले के इंदागांव थाने में जनवरी 2022 में एक युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसका आरोप था कि धर्मेंद्र कुमार नामक युवक उसे शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया और शारीरिक संबंध बनाए। बाद में युवक ने पीड़िता की जाति (SC) का हवाला देते हुए शादी से इनकार कर दिया। पुलिस ने इस मामले में दुष्कर्म (376), अपहरण (363, 366) और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियां और आधार : जस्टिस की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट (रायपुर) के फैसले को सही पाया और अभियोजन की दलीलों को निम्नलिखित आधारों पर ध्वस्त कर दिया:
- सहमति की पुष्टि : पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ मोटरसाइकिल पर गई थी और पहले भी कई बार रात में उससे मिलने जाती थी।
- मेडिकल रिपोर्ट में ‘जबरदस्ती’ के निशान नहीं : डॉक्टर की जांच में पीड़िता के शरीर पर न तो कोई चोट मिली और न ही जबरदस्ती यौन संबंध बनाने की पुष्टि हुई। पीड़िता ने डॉक्टर को भी बताया था कि संबंध मर्जी से बने थे।
- दबाव में बयान : कोर्ट में पीड़िता ने यह सनसनीखेज खुलासा किया कि उसने पुलिस रिपोर्ट पर केवल हस्ताक्षर किए थे और बयान पुलिस व परिजनों के दबाव में दिए थे।
- SC/ST एक्ट का गिरना : कोर्ट ने साफ कहा कि जब मूल अपराध (दुष्कर्म और अपहरण) ही साबित नहीं हुआ, तो अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत सजा का कोई आधार नहीं बचता।
कोर्ट का रुख : “ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप तभी संभव है जब वह पूरी तरह अवैध हो। इस मामले में अभियोजन यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि कोई अपराध हुआ है।”
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 31 अगस्त 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया। यह फैसला उन मामलों में एक नजीर पेश करता है जहाँ आपसी सहमति से बने संबंधों को बाद में आपराधिक रंग देने की कोशिश की जाती है।




