छत्तीसगढ़ : बलरामपुर में ग्रामीण की मौत पर गरमाई सियासत; डॉ. चरणदास महंत ने NHRC को लिखा कड़ा पत्र, निष्पक्ष जांच की मांग…

रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के हंसपुर गांव में एक आदिवासी ग्रामीण की कथित तौर पर ‘प्रशासनिक कार्रवाई’ के दौरान हुई मौत ने तूल पकड़ लिया है। प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाजा खटखटाया है।
“रक्षक ही बने भक्षक?” – पत्र में उठाए गंभीर सवाल : डॉ. महंत ने NHRC के अध्यक्ष जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन को लिखे पत्र में प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा “अत्यधिक बल प्रयोग” (Excessive use of force) किया गया, जिसके कारण एक निर्दोष आदिवासी की जान चली गई।
खबर के मुख्य बिंदु:
- घटनास्थल : हंसपुर गांव, जिला बलरामपुर, छत्तीसगढ़।
- आरोप : प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था के नाम पर की गई बर्बरता।
- मांग : डॉ. महंत ने पांच प्रमुख बिंदुओं पर आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
डॉ. महंत की NHRC से 5 बड़ी मांगें:
- स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच : पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच को सामने लाया जाए।
- दोषियों की पहचान : उन अधिकारियों को चिह्नित किया जाए जिनकी लापरवाही या कार्रवाई से मौत हुई।
- कठोर कार्रवाई : दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और प्रशासनिक मुकदमा दर्ज हो।
- मुआवजा : पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और संबल प्रदान किया जाए।
- पुनर्वास : घटना में घायल हुए अन्य ग्रामीणों का उचित उपचार और पुनर्वास सुनिश्चित हो।
“लोकतंत्र में ऐसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं” : नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि ये आरोप सच साबित होते हैं, तो यह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि इस घटना से स्थानीय समुदायों और नागरिक समाज में गहरा आक्रोश है। प्रशासन की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए न्याय का होना अनिवार्य है।
“न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है। आयोग को इस मामले में ‘अत्यधिक तत्परता’ दिखाते हुए हस्तक्षेप करना चाहिए।” डॉ. चरणदास महंत (पत्र के अंश)
आगे क्या? – अब सबकी निगाहें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पर टिकी हैं। क्या आयोग इस पर संज्ञान लेकर छत्तीसगढ़ शासन से रिपोर्ट तलब करेगा? बलरामपुर की इस घटना ने राज्य में आदिवासियों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।




