सक्ती एक्सक्लूसिव : चंद्रपुर बैंक मैनेजर का ‘कमीशन रेट’ फिक्स! किसानों ने खोला मोर्चा, 1 लाख पर मांगे जा रहे 1000 रुपये…

सक्ती। जिले के चंद्रपुर स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में भ्रष्टाचार और तानाशाही का ऐसा नंगा नाच चल रहा है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। किसानों द्वारा सौंपे गए नवीनतम दस्तावेजों ने शाखा प्रबंधक शत्रुघन सिंह पैंकरा के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी है। अब यह मामला केवल कहासुनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘खुलेआम वसूली’ का बन चुका है।

नया और बड़ा खुलासा: ‘बिना कमीशन, नहीं मिलेगा आपका अपना ही पैसा’ – विधायक और बैंक अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापनों में किसानों ने बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं :
- 1000 रुपये का फिक्स रेट : आरोप है कि बैंक प्रबंधक धान की राशि निकालने के बदले प्रति 1 लाख रुपये पर 1,000 रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं।
- पैसे दो या चक्कर काटो : जो किसान ‘कमीशन’ देने से मना करता है, उसे बेवजह बैंक के चक्कर कटवाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
- शाम का ‘गुप्त’ खेल : ज्ञापनों में उल्लेख है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर शाम 5 बजे के बाद बड़ी मात्रा में लेन-देन किया जाता है, जो वित्तीय हेरफेर की ओर इशारा करता है।
- गाली-गलौज और अपमान : किसानों का आरोप है कि प्रबंधक न केवल अभद्र भाषा और गाली-गलौज का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि आदिवासी किसानों पर जातिसूचक टिप्पणियां भी की जाती हैं।
सरपंचों ने भी मोड़ा अंगूठा : आंदोलन की सुलगती आग – इस बार केवल किसान ही नहीं, बल्कि कलमा, पलसदा और बालपुर जैसे कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भी अपने सील और दस्तखत के साथ इन शिकायतों पर मुहर लगाई है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि शत्रुघन पैंकरा को तत्काल पद से हटाकर निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो पूरा क्षेत्र आंदोलन की आग में झुलसने को तैयार है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल : शिकायती पत्र 07 फरवरी और 12 फरवरी 2026 को ही सौंप दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई न होना बैंक प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है। क्या बड़े अधिकारियों के संरक्षण में यह ‘कमीशन का खेल’ फल-फूल रहा है?
खबर का कड़क पहलू : “किसान का पसीना खेत में बहता है, लेकिन उसका हक बैंक की मेज के नीचे दम तोड़ रहा है। 1 लाख पर 1000 का ‘जजिया टैक्स’ आखिर किसकी शह पर वसूला जा रहा है?”




