लैलूंगा में ‘ऑपरेशन शंखनाद’ का खौफ: मशहूर तस्कर रब्बुल खान गिरफ्तार, 32 गौवंश मुक्त…

रायगढ़। पशु तस्करों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। एसएसपी शशि मोहन सिंह के कड़े तेवरों के साथ शुरू हुआ “ऑपरेशन शंखनाद” जिले में तस्करों की कमर तोड़ रहा है। इसी कड़ी में लैलूंगा पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए इलाके के कुख्यात मवेशी तस्कर रब्बुल खान को दबोच लिया है और उसके चंगुल से 32 बेजुबान गौवंशों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला है।
लैलूंगा पुलिस का ‘डबल अटैक’ – हफ्ते भर के भीतर लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव और उनकी टीम की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 7 फरवरी को भी 3 तस्करों को जेल भेजा गया था। पुलिस की इस बैक-टू-बैक कार्रवाई से सरहदी इलाकों में सक्रिय तस्कर गिरोहों में हड़कंप मच गया है।
ग्राम करवारजोर में घेराबंदी, क्रूरता की हदें पार – पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि तस्कर रब्बुल खान (39 वर्ष) मवेशियों को बेहद क्रूर तरीके से मारते-पीटते और भूखा-प्यासा दौड़ाते हुए ओडिशा के रास्ते बूचड़खाने ले जाने की फिराक में है। 10 फरवरी को लैलूंगा पुलिस ने ग्राम करवारजोर में घेराबंदी कर आरोपी को रंगे हाथों धर दबोचा।
- बरामदगी: 32 नग गौवंश (कीमत लगभग ₹2,56,000)
- कार्रवाई: छत्तीसगढ़ पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10, 11 के तहत केस दर्ज।
- सुरक्षा: सभी मवेशियों का मेडिकल चेकअप कराकर उन्हें सलखिया गौशाला में सुरक्षित भेज दिया गया है।
⚡ एसएसपी की दो टूक : “बख्शे नहीं जाएंगे तस्कर” – मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि रायगढ़ की धरती पर मवेशियों के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा:
“ऑपरेशन शंखनाद का मकसद तस्करी पर पूर्ण विराम लगाना है। जो भी बेजुबानों पर अत्याचार करेगा, उसका अगला ठिकाना जेल होगा।”
मुख्य भूमिका: इस सफल ऑपरेशन में उप निरीक्षक गिरधारी साव, प्रधान आरक्षक नंद कुमार पैंकरा, आरक्षक राजू तिग्गा और किशोर कुल्लू की जांबाजी रही।




