बलरामपुर

बड़ी कार्रवाई : भ्रष्टाचार के ‘खिलाड़ी’ पूर्व CEO श्रवण मरकाम गिरफ्तार, 12 साल बाद कानून के शिकंजे में ‘साहब’…

बलरामपुर। भ्रष्टाचार की फाइलें जब खुलती हैं, तो रसूखदारों के चेहरे से नकाब उतरने ही लगते हैं। जनपद पंचायत वाड्रफनगर में 30 लाख रुपये के सरकारी धन की बंदरबांट करने वाले तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण मरकाम को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।

कुटरचित दस्तावेजों का खेल: ऐसे डकारा सरकारी पैसा – ​यह मामला साल 2013-14 का है, जब विकास के नाम पर आए बजट को कागजों पर ही ‘खर्च’ कर दिया गया। जांच में जो सच सामने आया, वो चौंकाने वाला है:

  • हवा में हुआ विकास : धरातल पर जो काम कभी हुए ही नहीं, मस्टर रोल और फर्जी बिलों के जरिए उनका भुगतान कर दिया गया।
  • फर्जी हस्ताक्षर का सहारा : सरकारी खजाने पर डाका डालने के लिए कुटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार किए गए और विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।
  • संगठित गिरोह : इस गबन में CEO अकेले नहीं थे; यह एक पूरा सिंडिकेट था, जिसमें 4 आरोपी पहले ही सलाखों के पीछे जा चुके हैं।

फरारी कटी, पर कानून के हाथ नहीं बचे : आरोपी मरकाम लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे, लेकिन गुप्त सूचना ने उनकी फरारी का अंत कर दिया। वाड्रफनगर पुलिस की दबिश ने न केवल आरोपी को दबोचा, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में बैठे भ्रष्टाचारियों को यह संदेश भी दिया है कि ‘पाप का घड़ा’ एक न एक दिन भरता जरूर है।

हड़कंप: क्या और भी ‘मछलियां’ आएंगी जाल में? -​पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों और संपत्ति की बारीकी से जांच कर रही है। सूत्र बताते हैं कि पूछताछ में कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है जिन्होंने इस 30 लाख की ‘दावत’ में हिस्सा लिया था।

सीधा सवाल : आखिर 12 साल तक यह फाइल क्यों दबी रही? क्या सिस्टम में बैठे कुछ और लोग मरकाम को बचा रहे थे? अब जबकि गिरफ्तारी हो चुकी है, तो जनता उम्मीद कर रही है कि जनता की गाढ़ी कमाई के एक-एक पैसे की वसूली होगी।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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