लौह नगरी में जोशोखरोश से शुरू हुआ सीटू का आठवां छत्तीसगढ़ राज्य सम्मेलन

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/राजहरा। छत्तीसगढ़ की लौह नगरी दल्ली राजहरा में मजदूर आंदोलन की ऐतिहासिक धरती पर केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करने वाला सीटू का आठवां राज्य स्तरीय सम्मेलन भव्य रूप से प्रारंभ हो गया। 01 से 03 फरवरी तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जो श्रम कानूनों में संशोधन, बिजली निजीकरण और अन्य मुद्दों पर कड़ा संघर्ष करने का संकल्प जता रहे हैं। सम्मेलन का शुभारंभ झंडारोहण, शहीद श्रद्धांजलि और विशाल जुलूस के साथ हुआ, जिसमें वक्ताओं ने 12 फरवरी की प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के मेहनतकश वर्ग के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है।

सम्मेलन का भव्य आगाज
दल्ली राजहरा के सिंधु भवन में सभा स्थल पर हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) के राज्य अध्यक्ष के एसएन बनर्जी ने झंडा फहराकर आठवें छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसके ठीक बाद सदस्यों ने शहीद बेदी पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस भावुक क्षण के बाद जैन भवन चौक से एक विशाल जुलूस की शुरुआत हुई, जिसमें करीब 800 से अधिक सीटू कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। जुलूस जैन भवन चौक से गुप्ता चौक, शहीद शंकर गुहा नियोगी चौक और श्रम वीर चौक होते हुए वापस सभा स्थल पहुंचा, जहां यह आम सभा में तब्दील हो गया। इस जुलूस ने स्थानीय स्तर पर मजदूर एकता का मजबूत संदेश दिया।

आम सभा के प्रमुख वक्ता और अतिथि
आम सभा को मुख्य अतिथि के रूप में कामरेड तपन सेन, आल इंडिया सीटू के उपाध्यक्ष ने संबोधित किया। विशिष्ट अतिथियों में एसएस बनर्जी (अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सीटू), कामरेड एमके नंदी (महासचिव छत्तीसगढ़ सीटू), कामरेड धर्मराज महापात्रा (सचिव छत्तीसगढ़ सीटू), कामरेड एमएस शांत कुमार, कामरेड बीएम मनोहर तथा कामरेड केपीजी पाणिकर (संस्थापक सदस्य सीटू राजहरा) शामिल रहे। इन नेताओं की मौजूदगी ने सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। सभा में सीटू दल्ली राजहरा के संस्थापक सदस्य कामरेड के पी जी पाणिकर का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान भी किया गया, जो आयोजन की गरिमा को बढ़ाने वाला क्षण रहा।

केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार
सभा में केंद्र सरकार के श्रम-विरोधी कदमों पर जमकर निशाना साधा गया। वक्ताओं ने उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाले श्रम कानून संशोधनों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि ये कानून मजदूर हितैषी हैं, लेकिन वास्तविकता में ये मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की दिशा में हैं। कामरेड तपन सेन ने जोर देकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में संघर्ष अत्यंत आवश्यक है। संघर्ष के मैदान में डटे रहने के लिए हमें इसे और तेज करना होगा। उन्होंने लेबर कोड का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया। सरकार ने यूनियनों को बुलाकर लेबर कोड का विरोध न करने की सलाह दी, लेकिन हम ऐसी नीतियों के खिलाफ हड़ताल जरूर करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर सभी यूनियनों ने हड़ताल का ऐलान किया है, जिसमें बिजली निजीकरण, आंगनबाड़ी मजदूरों के मुद्दे प्रमुख हैं।
सेन ने आगे कहा कि जिनके खिलाफ हम लड़ रहे हैं, उनकी दादागिरी ताकत का नहीं बल्कि कमजोरी का प्रतीक है। सरकार का दावा है कि लेबर कोड सभी कर्मचारियों को कवर करेगा, लेकिन फैक्ट्री कवरेज को 10 से बढ़ाकर 30-40 मजदूरों तक कर दिया गया। छंटनी के लिए मालिकों को अब सरकार की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी; पहले 100 मजदूरों की सीमा थी, अब इसे 300 तक बढ़ा दिया। इससे 80 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों से बाहर हो जाएंगे और मालिकों की मनमानी चलेगी। हम इसे कभी नहीं होने देंगे। खदानों और कारखानों में मजदूर अगर जेब में हाथ डालकर बैठ जाएं तो कोई कंपनी नहीं चल सकती। 9 जुलाई की हड़ताल ने इसे साबित कर दिया। फिर भी सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए लेबर कोड लागू करने का फैसला लिया। इसलिए 12 फरवरी की हड़ताल को हर हाल में सफल बनाना होगा।

दल्ली राजहरा की ऐतिहासिक भूमिका
एसएन बनर्जी ने कहा कि लौह नगरी दल्ली राजहरा संघर्षों की नगरी है, जहां अनेक मजदूर आंदोलन हुए जो इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हैं। ऐसे नगर में सभा संबोधित करना गर्व का विषय है। केंद्र सरकार मेहनतकशों के खिलाफ लगातार कारपोरेट जगत के हित में निर्णय ले रही है और इसे रोकने वाला कोई नहीं दिख रहा। विषम परिस्थितियां बन रही हैं। किसानों के खिलाफ तीन कृषि कानून लाए गए, जिनका किसानों ने जबरदस्त विरोध किया और सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा। अब मजदूरों के खिलाफ चार श्रम कानून पारित किए गए। अचानक 21 नवंबर की रात को घोषणा की गई कि श्रम कानून लागू हो गए। ये कानून वेतन, कार्यस्थल स्थिति, महिलाओं की दशा और स्वास्थ्य सुरक्षा सबको प्रभावित करेंगे। इसलिए तीव्र संघर्ष जरूरी है।

मजदूर अधिकारों की रक्षा का संकल्प
कामरेड धर्मराज महापात्रा ने कहा कि 1886 से शुरू हुए संघर्षों से मजदूरों ने जो अधिकार हासिल किए, सरकार उन्हें छीनने की साजिश रच रही है। न्यूनतम वेतन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और आजीविका के अधिकार कुर्बानियों और लाल झंडे से मिले हैं, भीख में नहीं। आज सत्ता में बैठे लोग ऐसी नीतियां बना रहे हैं जो अधिकारों को कमजोर कर पूंजीवाद को मजबूत करेंगी। 12 फरवरी को छत्तीसगढ़ में हड़ताल होगी, राजहरा बंद रहेगा। हम ऐलान करते हैं कि यह धरती धनवानों की नहीं, मजदूरों और किसानों की है। मोदी और भाजपा से ही हिंदुस्तान नहीं बनता, सैकड़ों मजदूरों-किसानों की मेहनत से बनता है। मध्यान्ह भोजन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और खदानों के मजदूरों पर हमले जारी हैं। दल्ली राजहरा से निकलने वाला यह सम्मेलन का आह्वान पूरे भारत तक गूंजेगा।
सम्मेलन की सफलता में योगदान
यह सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण है, जहां मजदूर शोषण की कगार पर हैं और पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट मिल रही है। इसके खिलाफ 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल होगी। सम्मेलन को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष एमएस शांतकुमार, दल्ली राजहरा के कामरेड ज्ञानेंद्र सिंह, प्रकाश सिंह क्षत्रिय, पुरुषोत्तम सिमैया, विनोद मिश्रा एवं समस्त सीटू सदस्यों का पूर्ण योगदान रहा। तीन दिवसीय यह आयोजन मजदूर आंदोलन को नई गति प्रदान करेगा।




