रायगढ़ पुलिस का कड़ा प्रहार : ‘4 साल की बच्ची को जेल’ वाली खबर निकली कोरा झूठ, भ्रामक पोस्ट करने वालों पर गिरेगी गाज…

रायगढ़। सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी फैलाने के लिए “4 साल की बच्ची को जेल भेजने” की जो खबरें चलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से तथ्यहीन, भ्रामक और असत्य हैं। रायगढ़ पुलिस ने इस मामले में न केवल स्थिति स्पष्ट की है, बल्कि कानून का उल्लंघन कर मासूमों की तस्वीरें सार्वजनिक करने वाले पोर्टल्स को कानूनी कार्रवाई का अल्टीमेटम भी दिया है।
क्या है असली हकीकत? – घटनाक्रम की शुरुआत 5 फरवरी 2026 को ग्राम गेजामुडा में हुई थी। राजस्व विभाग की सीमांकन कार्यवाही के दौरान कुछ लोगों ने शासकीय कार्य में बाधा डाली थी। पुलिस जांच के बाद असली सच्चाई निम्न है :
- शासकीय कार्य में बाधा : कोतरारोड़ पुलिस ने धारा 132, 221 (BNS) के तहत अपराध दर्ज किया था।
- गिरफ्तारी : 22 मार्च को पहचान सुनिश्चित होने पर 4 आरोपियों की विधिवत गिरफ्तारी की गई।
- शांति भंग पर कार्रवाई : विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ती देख 4 वयस्क महिलाओं और 4 पुरुषों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई (BNSS 170/126) की गई।
- नाबालिगों का पक्ष : पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नाबालिग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। महिलाओं को एसडीएम कोर्ट द्वारा मुचलके पर उर्दना पुलिस लाइन से ही रिहा कर दिया गया था।
कानून का उल्लंघन : बच्चों के चेहरे किए सार्वजनिक – पुलिस ने गहरी आपत्ति जताई है कि कुछ इंस्टाग्राम पेजों और वेब पोर्टलों ने न केवल झूठ फैलाया, बल्कि नाबालिग बच्चों के फोटो और वीडियो बिना ब्लर किए प्रसारित किए। यह कृत्य सीधे तौर पर कानूनी नियमों का उल्लंघन है।
”भ्रामक खबरें फैलाना और बच्चों की निजता का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है। ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालकों को नोटिस जारी कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”
जिला पुलिस, रायगढ़
जिम्मेदार पत्रकारिता की अपील – रायगढ़ पुलिस ने मीडिया समूहों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से अपील की है कि वे व्यूज के चक्कर में सनसनीखेज और झूठी खबरें न परोसें। किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करें।




