सूरजपुर में कुदरत का कहर : मौत बनकर बरसी आंधी, SECL का स्वागत द्वार धराशायी, पेड़ के नीचे दबा युवक घायल…

सूरजपुर। आज की दोपहर सूरजपुर जिले में आई भीषण आंधी ने ऐसी तबाही मचाई कि चंद मिनटों में मंजर बदल गया। कहीं विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़ गए, तो कहीं लोहे के भारी-भरकम ढांचे ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस प्राकृतिक आपदा में एक युवक काल के गाल में समाते-समाते बचा, जबकि मुख्य चौक पर अफरा-तफरी का माहौल रहा।
मौत का द्वार : भरभराकर गिरा SECL का गेट – भटगांव का सबसे व्यस्त इलाका रविशंकर त्रिपाठी चौक उस वक्त दहल गया, जब दोपहर करीब 3:30 बजे SECL द्वारा निर्मित विशाल स्वागत द्वार तेज हवाओं का दबाव नहीं झेल सका।
- बाल-बाल बचे लोग : जिस वक्त यह ढांचा गिरा, वहां से वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही जारी थी।
- मची भगदड़ : गेट गिरने की आवाज इतनी जोरदार थी कि लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। गनीमत रही कि उस पल गेट के ठीक नीचे कोई नहीं था, वरना एक बड़ी जनहानि निश्चित थी।
भैसामुंडा मार्ग पर हादसा : पेड़ के नीचे दबा बाइक सवार – तबाही का दूसरा मंजर भैसामुंडा-बनारस मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास देखने को मिला। यहाँ एक विशाल पुराना आम का पेड़ आंधी में उखड़कर सीधे सड़क पर आ गिरा।
- पेट्रोल पंप कर्मी घायल : हादसे की चपेट में एक बाइक सवार पंप कर्मी आ गया। वह पेड़ की टहनियों के नीचे दब गया, जिसे स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
- अस्पताल में उपचार : घायल को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। इस दौरान घंटों सड़क जाम रही, जिसे बाद में पुलिस ने पेड़ हटवाकर बहाल कराया।
बड़ा सवाल : विकास या विनाश का ढांचा? – स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि क्या प्रशासन और SECL केवल हादसों का इंतजार करते हैं?
- मजबूती पर सवाल : क्या इन स्वागत द्वारों की समय-समय पर ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ (मजबूती की जांच) होती है?
- लापरवाही : सार्वजनिक स्थानों पर लगे ऐसे भारी ढांचों का गिरना सीधे तौर पर रखरखाव की कमी को दर्शाता है।
प्रशासनिक मुस्तैदी – घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। गिरे हुए मलबे को हटाकर यातायात सुचारु किया गया। हालांकि, जनता की मांग है कि जिले भर में लगे ऐसे पुराने पेड़ों और जर्जर हो चुके स्वागत द्वारों का सर्वे कराकर उन्हें सुरक्षित किया जाए ताकि अगली आंधी किसी की जान न ले ले।




