जंगल में ‘डाका’, सिस्टम पर तमाचा : महासमुंद में 60 बेशकीमती सागौन के पेड़ साफ, क्या ‘बलि का बकरा’ बनाकर बचेंगे बड़े अफसर?…

स्थान: महासमुंद (पिथौरा) रिपोर्ट: स्पेशल क्राइम डेस्क
महासमुंद। जिले में वन विभाग की नाक के नीचे “जंगल राज” चल रहा है। पिथौरा वन परिक्षेत्र के जम्हर जंगल में तस्करों ने कानून और खाकी के खौफ को कुचलते हुए 60 से ज्यादा बेशकीमती सागौन के पेड़ों का कत्लेआम कर दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों की कीमत रखने वाले ये पेड़ काट दिए गए, लकड़ी गायब हो गई, और वन विभाग कुंभकर्णी नींद सोता रहा।
मामला खुलने के बाद DFO मयंक पांडेय ने एक फॉरेस्ट गार्ड को सस्पेंड कर “खानापूर्ति” कर दी है, लेकिन इस “महा-घोटाले” ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
मिलीभगत का खेल या निकम्मापन? – इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई एक रात का खेल नहीं है। आरी चलती रही, पेड़ गिरते रहे, और तस्कर माल ले उड़े। यह सवाल उठना लाजिमी है कि:
- क्या वन विभाग के रक्षकों के कानों तक कुल्हाड़ी की आवाज नहीं पहुंची?
- क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर वर्दी के पीछे छिपी लकड़ी माफिया के साथ कोई ‘डीलिंग’ है?
स्थानीय लोगों के अनुसार, इतनी बड़ी लूट बिना किसी ‘भीतरी मदद’ के संभव ही नहीं है। विभाग को अब तक यह भी नहीं पता कि लाखों की यह लकड़ी काटकर आखिर खपाई कहां गई।
सिर्फ सिपाही पर गाज, बड़े साहबों का क्या? – DFO ने आनन-फानन में फील्ड पर तैनात एक फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया और जांच टीम गठित कर दी। लेकिन यह कार्रवाई जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसी लगती है।
सिस्टम से हमारे तीखे सवाल :
- रेंजर और डिप्टी रेंजर कहाँ थे? जब जंगल लुट रहा था, तब एसी कमरों में बैठे अधिकारी क्या कर रहे थे?
- कागजी गश्त का नाटक कब तक? क्या मॉनिटरिंग और गश्त के नाम पर सिर्फ रजिस्टर भरे जा रहे हैं?
- छोटी मछली का शिकार क्यों? क्या एक छोटे कर्मचारी को सस्पेंड कर बड़े मगरमच्छों (जिम्मेदार अधिकारियों) को बचाने की साजिश रची जा रही है?
तस्वीरें बयां कर रही हैं बर्बादी : जंगल की उजड़ी हुई तस्वीरें चीख-चीख कर बता रही हैं कि महासमुंद में वन माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं। जांच और रेड का आश्वासन तो दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि 60 हरे-भरे पेड़ों की बली चढ़ चुकी है।
अब देखना यह होगा कि जांच की आंच तस्करों और उनके “संरक्षकों” तक पहुँचती है, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।


