रायपुर में ‘मौत’ का गड्ढा : मकान मालिक की जानलेवा लापरवाही ने निगली 5 साल की मासूम की जान…

रायपुर : राजधानी में लापरवाही ने एक और हंसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ दी। मोवा थाना क्षेत्र में मकान मालिक की ‘जानलेवा कंजूसी’ और अंधी लापरवाही के चलते 5 साल की मासूम रिया महिलांग को अपनी जान गंवानी पड़ी। जिस घर में गोदभराई की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अब मातम की चीखें गूंज रही हैं।
सिस्टम और समझदारी दोनों “बोरी” से ढंक दिए गए – घटना शनिवार दोपहर 1 बजे की है। महासमुंद के पटेवा से अपने पिता एलन और मां धनेश्वरी के साथ मौसी की गोदभराई में आई रिया को क्या पता था कि जिस बाथरूम में वह जा रही है, वहां मकान मालिक जीवनलाल कुर्रे ने उसके लिए मौत का जाल बिछा रखा है।
- खौफनाक मंजर: बाथरूम में टॉयलेट का गंदा पानी निकालने के लिए गड्ढा खोदा गया था। सुरक्षा के नाम पर उस गहरे गड्ढे पर सिर्फ एक बोरी डाल दी गई थी। बाथरूम में दरवाजा तक नहीं था।
- हादसा: मासूम रिया का पैर उस बोरी पर पड़ा और वह सीधे सेप्टिक टैंक के गहरे गड्ढे में जा समाई। जब तक परिजनों ने चीख-पुकार सुनकर उसे बाहर निकाला, तब तक सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस और गंदे पानी ने उसकी सांसें छीन ली थीं।
यहां हर कदम पर है मौत का सामान : घटनास्थल पर की गई पड़ताल में लापरवाही की इंतहा दिखी। मकान मालिक ने न केवल बाथरूम के अंदर, बल्कि घर के बाहर भी एक गड्ढा खोदकर खुला छोड़ रखा है। यह साफ तौर पर बताता है कि मकान मालिक को इंसानी जान की कोई परवाह नहीं है। पुलिस का कहना है कि 4 दिन पहले ही यह गड्ढा खुदवाया गया था, लेकिन इसे बंद करने की जहमत नहीं उठाई गई।
फ्लैशबैक : रायपुर बना ‘कातिल गड्ढों’ का शहर – यह पहली बार नहीं है जब रायपुर की जमीन ने मासूमों को निगला है। ऐसा लगता है कि प्रशासन और मकान मालिकों ने बच्चों की जान को ‘सस्ता’ समझ लिया है। आंकड़े गवाह हैं कि शहर में खुला गड्ढा छोड़ना अब एक ‘खूनी परंपरा’ बन चुका है।
पिछले साल (2025) की वो 3 मौतें, जिन्हें शहर भूला नहीं है :
- 11 नवंबर 2025: सरकारी स्कूल के पास खेलते हुए दो मौसेरे भाई – सत्यम (8) और आलोक (7) -फॉर्च्यून डेवलपर्स द्वारा छोड़े गए पानी से भरे गड्ढे में डूब गए। वे भी एक बर्थडे पार्टी में आए थे। खुशियां वहां भी मातम में बदली थीं।
- 13 अप्रैल 2025: रामनगर के गुलमोहर पार्क में निगम द्वारा खोदे गए गड्ढे में 3 बच्चे गिरे, जिसमें से एक की मौत हो गई।
- 12 अप्रैल 2025: शीतला मंदिर के पास निगम के ही खुले गड्ढे में 3 साल का बच्चा गिरा। गनीमत थी कि एक राहगीर ने उसे बचा लिया।
सुलगते सवाल : आखिर जिम्मेदार कौन? – रिया की मौत ने एक बार फिर वही पुराने और चुभने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं :
- मकान मालिक की गिरफ्तारी काफी है? ऐसे जानलेवा गड्ढे खोदकर खुला छोड़ने वालों पर ‘गैर-इरादतन हत्या’ का केस दर्ज कर सख्त सजा क्यों नहीं दी जाती?
- प्रशासन कब जागेगा? क्या रायपुर नगर निगम और पुलिस प्रशासन सिर्फ शव गिनने के लिए बैठा है? खुले गड्ढों की मॉनिटरिंग कौन करेगा?
- और कितनी रिया? क्या हम अगली घटना का इंतजार कर रहे हैं?
5 साल की रिया अब कभी नहीं लौटेगी, लेकिन उसकी मौत चीख-चीख कर कह रही है कि अगर अब भी खुले गड्ढों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति नहीं अपनाई गई, तो रायपुर की मिट्टी मासूमों के खून से सनती रहेगी।




