रायगढ़

BREAKING : ‘जशपुर जनसंपर्क कांड’ में पत्रकार का ‘लीगल स्ट्राइक’ – अफसर नूतन सिदार पर कोर्ट केस दर्ज! 10 अप्रैल को देना होगा जवाब…

रायगढ़/जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में ‘अफसरशाही के अहंकार’ को करारा झटका लगा है। पत्रकार को डराने के लिए 1 करोड़ का नोटिस भेजने और बिना दोष सिद्ध हुए ‘अपराधी’ घोषित करने वाली जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक नूतन सिदार अब खुद कानूनी शिकंजे में फंस गई हैं। पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए नूतन सिदार के खिलाफ न्यायालय में परिवाद (Complaint Case) दायर कर दिया है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

कोर्ट नंबर 3 में केस रजिस्टर्ड : अब न्यायालय करेगा फैसला – ​ताजा दस्तावेजों के अनुसार, पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने ‘सिविल जज जूनियर डिवीजन, घरघोड़ा’ (Civil Judge Junior Division Gharghora) के न्यायालय में नूतन सिदार के खिलाफ वाद दायर किया है।

  • केस नंबर: 26/2026
  • फाइलिंग तारीख: 16-01-2026
  • CNR नंबर: CGRG070000322026
  • केस का प्रकार: COMPLAINT CASES (परिवाद पत्र)
  • याचिकाकर्ता: ऋषिकेश मिश्रा (अधिवक्ता: श्री राकेश बेहरा)
  • अनावेदिका (Respondent): नूतन सिदार

10 अप्रैल को होगी सुनवाई : अफसर की बढ़ीं मुश्किलें – ​न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए सुनवाई की अगली तारीख 10-04-2026 निर्धारित की है।

  • केस स्टेज: अपीयरेंस (Appearance)। इसका मतलब है कि मामले में कार्यवाही शुरू हो चुकी है और अब नूतन सिदार को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
  • ​जिस अधिकारी ने पत्रकार को पुलिस थाने के माध्यम से डराने की कोशिश की थी, अब उसे उसी कानून के समक्ष जवाब देना होगा।

फ्लैशबैक : क्यों हुआ यह ‘महामुकाबला’? – ​यह कानूनी लड़ाई उस वक्त शुरू हुई जब जनसंपर्क विभाग के कर्मचारी रविन्द्रनाथ राम ने अधिकारी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या का प्रयास किया।

  • सच दिखाने की सजा: जब पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने इस प्रताड़ना और विभाग में चल रहे ‘फर्जी वेतन आहरण’ (अजय सिदार के नाम पर) का खुलासा किया, तो अधिकारी बौखला गईं।
  • गैर-संवैधानिक कृत्य: नूतन सिदार ने 2 सितंबर 2025 को पुलिस को दिए आवेदन में पत्रकार को बिना किसी अदालती आदेश के लिखित में ‘अपराधी’ (Criminal) कहा और उस पत्र को कलेक्टर के ग्रुप में वायरल कर दिया।
  • 1 करोड़ का नोटिस: पत्रकार की आवाज दबाने के लिए उन्हें 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया। लेकिन पत्रकार ने डरने के बजाय अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

PMO के बाद अब न्यायपालिका की शरण में मामला – पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक इस मामले को पहुँचाया है।

  • ​PMO में शिकायत (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2025/0229404) पहले ही दर्ज है और प्रक्रियाधीन है।
  • ​अब न्यायालय में केस नंबर 26/2026 दर्ज होने से यह स्पष्ट हो गया है कि पत्रकार अपने संवैधानिक अधिकारों और मानहानि के लिए अंत तक लड़ने को तैयार हैं।

बड़ा सवाल : क्या प्रशासन अब भी साधेगा चुप्पी?

  • ​एक तरफ PMO की जांच, दूसरी तरफ न्यायालय में दर्ज मुकदमा। क्या अब भी जशपुर कलेक्टर और पुलिस प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश करेंगे?
  • ​पुलिस प्रशासन ने RTI के तहत जानकारी देने में जो आनाकानी की थी, वह अब कोर्ट में उनके खिलाफ जा सकती है।

​यह मामला ‘कलम बनाम सत्ता’ की सबसे बड़ी लड़ाई बन चुका है। पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने कोर्ट में केस दर्ज कराकर यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र में कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। 16 जनवरी 2026 को दायर यह मुकदमा नूतन सिदार के करियर और साख पर भारी पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें 10 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं, जब न्यायालय में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई होगी।

नोट : यह खबर आधिकारिक अदालती रिकॉर्ड (e-Courts Services) और प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर पुष्टि की गई है।

पूर्व में प्रकाशित खबर :

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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