अंबिकापुर

सरगुजा में ‘कर्ज’ का कोहराम : किसानों के नाम पर करोड़ों का डाका, दाने-दाने को मोहताज हुए अन्नदाता!…

अंबिकापुर (ब्रेकिंग): सरगुजा की धरती पर सहकारिता के नाम पर एक ऐसा ‘ब्लैक होल’ सामने आया है, जिसमें किसानों की पूरी जमा-पूंजी समा गई है। केरजू सहकारी समिति में हुए इस महा-घोटाले ने न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी है, बल्कि एक प्रबंधक की जान भी ले ली है। 2000 से अधिक किसान आज अपनी ही फसल के पैसे के लिए कलेक्ट्रेट की चौखट पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

हेराफेरी का मास्टरप्लान : किसान खेत में पसीना बहाता रहा, बैंक में ‘फर्जी लोन’ बंटता रहा! -​सीतापुर ब्लॉक के 5 गांवों (केरजू, कुनमेरा, ढोढ़ागांव, बंशीपुर और हरदीडांड) के किसानों के साथ जो हुआ, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है।

  • धोखाधड़ी का खेल : किसानों ने जितना कर्ज लिया नहीं, उससे कई गुना ज्यादा उनके खाते में दर्ज कर दिया गया।
  • बिना बताए वसूली : जब किसान धान बेचकर पैसे लेने ‘पेटला बैंक’ पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि वे ‘लाखों के कर्जदार’ हैं। बैंक ने बिना पूछे ही उनकी धान की पूरी राशि लोन में काट ली।

मैनेजर की ‘मौत’ या घोटाले का दफन राज? – इस सनसनीखेज कांड का सबसे डरावना पहलू समिति प्रबंधक दिनेश गुप्ता की आत्महत्या है। 25 दिसंबर की रात को प्रबंधक का किसानों से लोन समायोजन को लेकर विवाद हुआ और उसी रात उन्होंने फांसी लगा ली।

बड़ा सवाल : क्या प्रबंधक पर बड़े सफेदपोशों का दबाव था? क्या करोड़ों के इस फर्जीवाड़े की फाइलें दबाने के लिए मौत का रास्ता चुना गया?

‘करोड़ों का डाका डाला गया है’ – पूर्व मंत्री अमरजीत भगत : पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने मोर्चा संभालते हुए सीधे तौर पर इसे करोड़ों का घोटाला करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक जानबूझकर लोन लेने वालों की लिस्ट छुपा रहा है। कलेक्ट्रेट पहुंचे 200 से अधिक किसानों के चेहरों पर आक्रोश और बेबसी साफ दिख रही थी।

कलेक्टर का कड़ा रुख : जांच की आंच कहां तक जाएगी? – सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का ऐलान किया है। उन्होंने साफ कहा है कि शिकायतों के आधार पर समिति की बारीकी से जांच होगी।

फर्जीवाड़े का ‘डेथ वारंट’ :

  • पीड़ित : 2000 से ज्यादा पंजीकृत किसान।
  • प्रभावित गांव : 5 (केरजू क्लस्टर)।
  • मुख्य आरोपी : अज्ञात ‘सिस्टम’ और बैंक की संदिग्ध कार्यप्रणाली।
  • नतीजा : मेहनत की कमाई शून्य, किसान कर्ज के बोझ तले दबा।

जनता की आवाज़ : “हम खून जलाकर धान उगाते हैं ताकि परिवार पल सके, लेकिन यहाँ तो कागजों में हमें लुटेरा बना दिया गया। हमारी राशि वापस मिले और दोषियों को जेल भेजा जाए!” आक्रोशित किसान

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!