एक्सक्लूसिव : ‘मंत्री जी’ के रसूख का खौफनाक खेल! सरकारी नौकरी के नाम पर 25 लाख की महाठगी, सरगुजा कुटीर से चली साजिश की स्क्रिप्ट…

बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ में सत्ता के गलियारों और सरकारी बंगलों का इस्तेमाल कर किस तरह बेगुनाह लोगों को ठगा जा रहा है, इसका एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के कथित करीबियों ने मिलकर एक पोल्ट्री फार्म संचालक को सरकारी नौकरी का झांसा देकर 25 लाख रुपये लूट लिए। इस पूरी साजिश का केंद्र बिंदु राजधानी रायपुर का ‘सरगुजा कुटीर’ बना, जहां कथित तौर पर मंत्री के ‘खास लोगों’ ने बैठकर सौदेबाजी की।
ठगी के मुख्य किरदार (The Masterminds) : इस पूरे जालसाजी के खेल में मुख्य रूप से दो नाम सामने आए हैं:
- राजा भैया लहरे : (पिता: पुनीत राम लहरे, निवासी: छैडोलिया/कोसा, जांजगीर-चांपा) – इसने खुद को मंत्री का बेहद करीबी बताकर पीड़ित को जाल में फंसाया।
- सुरेश लहरे : (निवासी: ढाबाडीह/कोसा) – जो वर्तमान में ग्राम कोसा में शिक्षक के पद पर कार्यरत है और जिसे पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का OSD/PA बताकर पेश किया गया।
साजिश का क्रम : 01 जुलाई से शुरू हुआ ‘शिकार’ – पीड़ित अंबिका प्रसाद भारद्वाज (निवासी: उरैहा, पामगढ़), जो एक पोल्ट्री फार्म संचालक हैं, उन्होंने अपनी शिकायत में ठगी की पूरी टाइमलाइन बताई है:
- 01 जुलाई 2023 : पीड़ित के चाचा ससुर मोहन रात्रे के जरिए राजा भैया लहरे से मुलाकात हुई। राजा ने दावा किया कि उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक है और वह रायपुर एवं मुंगेली के परिवार न्यायालय में नौकरी लगवा सकता है।
- 04 जुलाई 2023 : राजा भैया लहरे अपनी थार गाड़ी (CG 11 AR 9999) से पेंड्रीडीह मोड़ पहुंचा। उसने पीड़ित के बेटे राहुल और भतीजे हरीश का फॉर्म भरवाया और ‘एडवांस’ के नाम पर 50,000 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
- रायपुर का ‘सरगुजा कुटीर’ कनेक्शन : कुछ दिनों बाद राजा भैया लहरे पीड़ित को रायपुर स्थित सरगुजा कुटीर ले गया। वहां उसकी मुलाकात सुरेश लहरे से कराई गई, जिसने खुद को ओएसडी बताकर भरोसा दिया कि “काम जल्द हो जाएगा।” वहां फिर 1 लाख रुपये लिए गए।
फर्जी मेरिट लिस्ट और 25 लाख की वसूली – आरोपियों ने विश्वास जीतने के लिए जालसाजी की हदें पार कर दीं:
- नकली मेरिट लिस्ट : आरोपियों ने रायपुर न्यायालय का एक फर्जी विज्ञापन (क्र. 47/दो-11-/2013) दिखाया, जिसमें पीड़ित के बेटे का नाम 5वें स्थान पर था।
- किस्तों में लूट : मुलमुला के त्रिमूर्ति चौक पर 2 लाख रुपये नगद लिए गए।
- पेंड्रीडीह बाईपास के पास 4 लाख रुपये नगद लिए गए।
- साक्षात्कार के नाम पर रायपुर कोर्ट बुलाकर फिर 35,000 रुपये वसूले गए।
- कुल हिसाब : पीड़ित के बैंक खाते से 17.65 लाख रुपये और नगद 7.35 लाख रुपये, इस तरह कुल 25 लाख रुपये की ठगी की गई।
भंडाफोड़ और मौत की धमकी – जब पीड़ित ने रायपुर कोर्ट जाकर खुद जांच की, तो पता चला कि वहां ऐसी कोई भर्ती निकली ही नहीं है। ठगी का अहसास होते ही जब पीड़ित ने सुरेश लहरे (मो. 94255XXXXX) को फोन कर पैसे मांगे, तो आरोपियों ने असली चेहरा दिखाया। आरोपियों ने धमकी देते हुए कहा :
“हम मंत्री के आदमी हैं। जिससे पैसा लेते हैं उसे दुनिया से उठवा देते हैं। तुम्हारी लाश भी नहीं मिलेगी। जहां शिकायत करना है करो, हमारा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता।”
पुलिस की भूमिका पर सवाल और कोर्ट का ‘हंटर’ – पीड़ित अंबिका प्रसाद ने 20 मई 2024 को हिर्री थाने में शिकायत की, लेकिन रसूखदारों के दबाव में पुलिस ने आवेदन तक नहीं लिया। इसके बाद 06 जून 2024 को एसपी बिलासपुर से गुहार लगाई गई, लेकिन वहां भी सिर्फ कथन लेकर छोड़ दिया गया।
अंतत : पीड़ित को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (बिल्हा) की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए धारा 175(3) BNSS के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दिया। अब हिर्री पुलिस ने आरोपी राजा भैया लहरे के खिलाफ IPC की धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की ठगी का नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या सरकारी शिक्षक (सुरेश लहरे) जैसे पद पर बैठे लोग मंत्रियों के नाम का सहारा लेकर गिरोह चला रहे हैं? पुलिस अब आरोपियों के बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है ताकि इस महाठगी की जड़ों तक पहुंचा जा सके।




