बड़ा धमाका : क्या पुलिस विभाग बचा रहा है ‘रेत माफिया’ के मददगारों को? RTI के खुलासे से मचा हड़कंप!…

रायगढ़/बिलासपुर: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को रोकने की लाख कोशिशें कर ली जाएं, लेकिन सच दबने वाला नहीं है। बिलासपुर रेलवे पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के एक पत्र ने उस समय खलबली मचा दी, जब अवैध रेत उत्खनन जैसे गंभीर मामले में विभाग ने ‘गोपनीयता’ का चोला ओढ़ने की कोशिश की।
- क्या विभाग अब वह “शिकायती पत्र” सार्वजनिक करेगा जिससे रेत माफिया के चेहरे बेनकाब होंगे?
- 10 दिन की समय सीमा के बाद क्या प्रशासन पारदर्शिता दिखाएगा या नया बहाना तलाशेगा?
RTI से डर क्यों? क्या छुपा रही है पुलिस? – मामला पोरफोड़ा (पोकरामुड़ा) क्षेत्र का है, जहाँ बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें हुई थीं। जब निर्भीक पत्रकार जितेंद्र कुमार जायसवाल ने इस पर हुई कार्रवाई का कच्चा चिट्ठा (शिकायती पत्र और एक्शन रिपोर्ट) RTI के जरिए मांगा, तो विभाग ने सीधे जानकारी देने के बजाय ‘धारा 11(1)’ का दांव खेल दिया। प्रशासन ने इसे ‘तृतीय पक्ष’ की जानकारी बताकर मामले को ठंडा करने की कोशिश की।

“हमें कोई डर नहीं, सब सच सामने लाओ” – ऋषिकेश मिश्रा – प्रशासन का यह दांव तब उल्टा पड़ गया जब संबंधित पक्ष ऋषिकेश मिश्रा ने डंके की चोट पर अपनी लिखित सहमति दे दी। उन्होंने दो टूक कहा :

“जितेंद्र भैया मेरे मार्गदर्शक और पत्रकारिता के गुरु हैं। विभाग के पास जो भी जानकारी है, उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए। हम सच के साथ खड़े हैं।”
डिजिटल मीडिया की धमक : PM और CM के विजन पर प्रशासन का ‘अड़ंगा’? – एक तरफ डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त भारत के संकल्प को घर-घर पहुँचाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर सिस्टम में बैठे कुछ लोग ‘सहमति-असहमति’ के कागजी जाल बुनकर अवैध खनन के दोषियों को बचाने की फिराक में दिख रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है : सावधान रहें! यह सिर्फ एक RTI का जवाब नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक पत्रकार की जंग है। हम इस खबर की एक-एक परत उधेड़ना जारी रखेंगे।



