करोड़ों की जमीन, फर्जी आधार और 3 साल की फरारी: जांजगीर में ₹24 लाख के मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश…

जांजगीर-चांपा। भू-अधिग्रहण मुआवजे के नाम पर जालसाजी करने वाले एक अंतरराज्यीय स्तर के शातिर गिरोह का अकलतरा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। फर्जी आधार कार्ड के जरिए 24 लाख रुपये डकारने वाले 5 मुख्य आरोपियों को पुलिस ने फिल्मी अंदाज में दबिश देकर गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पिछले 3 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे।
ऐसे रचा गया जालसाजी का चक्रव्यूह : यह पूरा मामला ग्राम तरौद के योगेन्द्र सिंह चंदेल की जमीन से जुड़ा है, जिसे के.एस.के. वर्धा पावर प्लांट के लिए अधिग्रहित किया गया था। मुआवजे की 24 लाख रुपये की राशि हाईकोर्ट में विचाराधीन थी। इसी बीच जालसाजों ने एक सोची-समझी साजिश रची:
- फर्जी पहचान: आरोपियों ने प्रार्थी और उसके भाई के नाम पर फर्जी आधार कार्ड तैयार किए।
- बैंक में सेंधमारी: इन फर्जी दस्तावेजों के दम पर जांजगीर के DCB बैंक में खाता खुलवाया गया।
- रकम की निकासी: कोर्ट और विभाग की नजरों से बचते हुए पूरी मुआवजा राशि निकाल ली गई और आपस में बांट ली गई।
पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और गिरफ्तारी : अप्रैल 2023 में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस लगातार तकनीकी साक्ष्य जुटा रही थी। खाद्य विभाग से मिले आधार डेटा और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस ने दीपक दिवाकर और नरेश रत्नाकर को दबोचा। कड़ाई से पूछताछ में इस साजिश के मास्टरमाइंड्स का खुलासा हुआ।
- दीपक दिवाकर
- नरेश रत्नाकर
- शंकर लाल भारद्वाज (साजिशकर्ता)
- परमेश्वर पाटले
- विश्राम भारद्वाज
गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली:
कानूनी शिकंजा : अकलतरा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (दस्तावेजों में कूटरचना) और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इनके पास से फर्जी आधार कार्ड, बैंक रिकॉर्ड और मोबाइल जब्त किए हैं। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
सबक : यह मामला बैंकिंग सिस्टम और आधार सत्यापन की प्रक्रियाओं में मौजूद खामियों पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।




