भ्रष्टाचार पर ‘RTI’ का सर्जिकल स्ट्राइक : घरघोड़ा नगर पंचायत के ‘बंद कमरों’ के राज खुलेंगे?…

घरघोड़ा। होस. – नगर पंचायत घरघोड़ा के विकास कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी के दावों की अब ‘RTI’ (सूचना का अधिकार) की कसौटी पर अग्निपरीक्षा होने वाली है। स्थानीय जागरूक नागरिकों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक साथ कई गंभीर मामलों में सूचना के अधिकार के तहत फाइलों का हिसाब माँगा है। माना जा रहा है कि अगर दस्तावेजों की बारीकी से जांच हुई, तो कई रसूखदारों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
इन 5 मोर्चों पर फंसा है ‘पेंच’: : कागजों पर दौड़ रही कचरा गाड़ियाँ? – सूत्रों के अनुसार, नगर पंचायत के वाहनों के डीजल और मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने लाखों का वारा-न्यारा किया जा रहा है। RTI के जरिए पिछले एक साल की लॉग-बुक और डीजल बिलों का मिलान किया जाएगा। सवाल यह है कि क्या वाकई गाड़ियाँ उतनी चलीं जितना बिल निकाला गया?
गुणवत्ता विहीन निर्माण और ‘कमीशन’ का खेल : नगर के वार्डों में बनी नालियों और सड़कों की हालत कुछ ही महीनों में जर्जर हो गई है। RTI कार्यकर्ता अब ‘धारा 2(j)(iii)’ का उपयोग कर निर्माण सामग्री के प्रमाणित नमूने (Samples) लैब भेजने की तैयारी में हैं। ‘मेजरमेंट बुक’ (MB) और असल निर्माण के बीच के अंतर को उजागर करने की रणनीति बनाई गई है।
PM आवास : किसका हक मारा गया? – गरीबों के आशियाने के नाम पर अपात्रों को रेवड़ी बांटने और पात्रों को किस्तों के लिए चक्कर लगवाने की शिकायतें आम हैं। स्वीकृत और निरस्त आवेदनों की सूची सार्वजनिक करने की मांग ने अधिकारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
लाइट और सफाई : अंधेरे में करोड़ों का बजट? – स्ट्रीट लाइटों की खरीदी और सफाई के लिए खरीदे गए संसाधनों की कीमतों में बाजार भाव से भारी अंतर होने की आशंका है। RTI के माध्यम से उन फर्मों की कुंडली खंगाली जा रही है जिन्हें बार-बार टेंडर दिए जा रहे हैं।
मस्टर रोल में ‘भूतिया’ कर्मचारी? – चर्चा है कि सफाई और अन्य कार्यों के लिए कागजों पर ऐसे कर्मचारी भी तैनात हैं जो कभी फील्ड पर दिखे ही नहीं। उनके मानदेय का भुगतान किसके खाते में जा रहा है, इसकी जांच के लिए उपस्थिति पत्रक मांगे गए हैं।
अधिकारियों में हड़कंप, जनता की पैनी नजर : RTI के इस प्रहार ने नगर पंचायत कार्यालय के भीतर हड़कंप मचा दिया है। आमतौर पर सूचना देने में आनाकानी करने वाले विभाग के पास अब केवल 30 दिन का समय है। जानकारों का कहना है कि यदि जानकारी आधी-अधूरी या गलत दी गई, तो मामला प्रथम अपील और सीधे राज्य सूचना आयोग तक जाएगा, जहाँ भारी जुर्माने का प्रावधान है।
“नगर की पाई-पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। RTI कोई कागजी कार्यवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधा युद्ध है।”
एक स्थानीय जागरूक नागरिक




