जशपुर विशेष रिपोर्ट : सरकारी तंत्र की आँखों में धूल झोंककर ‘कोनपारा’ में करोड़ों का धान खुर्द-बुर्द, 6 के खिलाफ FIR…

जशपुर। सरकारी नीतियों और किसान कल्याण के उद्देश्यों पर किस प्रकार ‘सिस्टम के भीतर’ बैठे लोग ही सेंध लगाते हैं, इसका एक वीभत्स उदाहरण जशपुर जिले के तुमला क्षेत्र में सामने आया है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कोनपारा में हुए ₹6.55 करोड़ के धान घोटाले ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की शुचिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी खजाने को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है।
दस्तावेजों में पहाड़, धरातल पर खाली मैदान – यह मामला किसी सामान्य भूल-चूक का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र का प्रतीत होता है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उपार्जन केंद्र में 1,61,250 क्विंटल धान की आवक दर्ज की गई थी, लेकिन जब भौतिक सत्यापन का समय आया, तो 20,586.88 क्विंटल धान का कहीं अता-पता नहीं मिला। ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से केवल इस लापता धान की कीमत ही 6.38 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

भ्रष्टाचार की ‘संगठित’ कार्यशैली – इस प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें जिम्मेदारी के पदों पर बैठे छह व्यक्तियों की संलिप्तता पाई गई है। अपैक्स बैंक के नोडल अधिकारी द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, प्राधिकृत अधिकारी भुनेश्वर साय और समिति प्रबंधक जयप्रकाश साहू समेत पूरी टीम (कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर फड़ प्रभारी तक) इस आर्थिक अनियमितता में समान रूप से भागीदार प्रतीत होते हैं। इन ‘कथित’ लोकसेवकों ने न केवल धान, बल्कि 59,137 सरकारी बारदानों का भी गबन कर लिया, जिसकी कुल कीमत लगभग ₹17 लाख है।
विधिक कार्रवाई और प्रशासनिक प्रहार – प्रशासन ने इस धृष्टता पर कड़ा रुख अपनाते हुए तुमला थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कराया है :
- धारा 318(4) व 320 : धोखाधड़ी और गंभीर आर्थिक लाभ के विरुद्ध।
- धारा 336 व 338 : अभिलेखों के साथ जालसाजी और कूटरचना।
- धारा 61 : आपराधिक षड्यंत्र की रचना।
व्यवस्था पर गहरा आघात – यह घोटाला उस समय सामने आया है जब शासन किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए करोड़ों का निवेश कर रहा है। ऐसे में जिम्मेदार पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा ₹6,55,26,979.40 की इतनी बड़ी राशि का गबन करना व्यवस्था के साथ विश्वासघात है। यह प्रश्न अनुत्तरित है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान (लगभग 200 ट्रक माल) केंद्र से बाहर चला गया और जिम्मेदार उच्चाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी?
पुलिस अब इस ‘सिंडिकेट’ की गहराई तक जाने का प्रयास कर रही है। देखना यह होगा कि क्या केवल इन छह कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या उन कड़ियों को भी जोड़ा जाएगा जिन्होंने इस गबन को फलने-फूलने का संरक्षण प्रदान किया।
पार्ट 2 में खुलेंगे मामले में संलिप्त लोगों के कई बड़े और गहरे राज…





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