सरगुज़ा पुलिस की अनोखी पहल : ‘फिट पुलिस, हिट पुलिसिंग’ का मंत्र, अनफिट जवान मैदान में बहा रहे पसीना

सरगुज़ा। अपराधियों के पीछे भागने वाली पुलिस अब खुद की फिटनेस के पीछे भाग रही है। सरगुज़ा संभाग में पुलिस विभाग ने एक ऐसी मुहिम छेड़ी है, जिसने न केवल जवानों की दिनचर्या बदल दी है, बल्कि पुलिसिंग का चेहरा बदलने की भी उम्मीद जगाई है। तोंद और व्यसन से परेशान पुलिसकर्मियों को ‘फिट’ और ‘फाइन’ बनाने के लिए विशेष ट्रेनिंग शुरू की गई है, जिसके शानदार नतीजे सामने आ रहे हैं।
क्यों पड़ी इस मुहिम की ज़रूरत? – पुलिस की नौकरी में भागदौड़ अहम होती है, लेकिन कई बार अनियमित दिनचर्या और तनाव के चलते जवान अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सरगुज़ा संभाग में यह समस्या बड़ी होकर सामने आई :
- कई पुलिसकर्मियों की तोंद बाहर निकल आई थी।
- कुछ जवान शराब और अन्य व्यसनों की लत का शिकार हो चुके थे।
- शारीरिक रूप से अनफिट होने के कारण पुलिसिंग की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा था।
आईजी दीपक झा का विज़न: सज़ा नहीं, सुधार है : इस बदलाव की नींव सरगुज़ा संभाग के आईजी दीपक झा ने रखी। उन्होंने संभाग भर के पुलिसकर्मियों का डेटा तैयार करवाया।
- चौंकाने वाला आंकड़ा : डेटा में पाया गया कि 300 से ज्यादा जवान शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं या किसी न किसी व्यसन से जूझ रहे हैं।
- एक्शन प्लान : इन जवानों को फिट करने के लिए 50-50 का बैच बनाया गया।
- मकसद : आईजी का स्पष्ट कहना है कि “यह कोई सज़ा नहीं है, बल्कि जवानों को जीवन जीने की कला सिखाने का प्रयास है। स्वस्थ जवान ही अपने परिवार को खुशहाल रख सकता है और समाज को बेहतर पुलिसिंग दे सकता है।”
CRPF सेंटर बना फिटनेस का अखाड़ा : इन अनफिट जवानों (जिनमें आरक्षक से लेकर टीआई स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं) को CRPF के ट्रेनिंग सेंटर में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहाँ की दिनचर्या बेहद सख्त और अनुशासित है :
- सुबह 4 बजे की शुरुआत : ट्रेनिंग भोर में 4 बजे शुरू हो जाती है।
- होलिस्टिक ट्रेनिंग : केवल दौड़-भाग नहीं, बल्कि शारीरिक व्यायाम के साथ-साथ योगा और मेडिटेशन भी कराया जाता है ताकि मानसिक तनाव कम हो।
- खान-पान पर पहरा : डाइट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। तली-भुनी चीज़ों और नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाई गई है।
- वीकली ऑफ : कड़ी मेहनत के बाद हफ्ते में एक दिन का अवकाश भी दिया जाता है।
दिखने लगा बदलाव : “खुद को 5 साल युवा महसूस कर रहे हैं जवान” – इस मुहिम का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। ट्रेनिंग ले रहे पुलिसकर्मियों के चेहरों पर नई चमक और शरीर में नई स्फूर्ति है।
- वजन में कमी: कई जवानों का वजन ट्रेनिंग के दौरान ही 4 से 5 किलो तक कम हो गया है।
- ऊर्जा का संचार: जवानों का कहना है कि वे अब अपनी उम्र से 4-5 साल छोटा (युवा) महसूस कर रहे हैं।
- आत्मविश्वास: शारीरिक समस्याओं के समाधान के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी लौटा है, जो ड्यूटी के दौरान काम आएगा।
एक स्वस्थ पुलिस, सुरक्षित समाज : सरगुज़ा पुलिस की यह पहल साबित करती है कि विभाग सिर्फ कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अपने परिवार (पुलिसकर्मियों) की सेहत की भी चिंता करता है। उम्मीद है कि इस ट्रेनिंग के बाद जब ये ‘नए’ जवान थानों में लौटेंगे, तो जनता को एक चुस्त, दुरुस्त और संवेदनशील पुलिस का चेहरा देखने को मिलेगा।




