रायगढ़

महापंचायत विशेष : घरघोड़ा क्षेत्र में कुरकुट नदी का ‘कत्ल’ और सिस्टम का ‘मौन’!…

• मदहोश प्रशासन, बेलगाम माफिया : सीसीटीवी के ‘तीसरी आंख’ के नीचे से सरेआम गुजर रहा ‘पीला सोना’..

रायगढ़। जिले में घरघोड़ा नगर की जीवनदायिनी कुरकुट नदी आज अपने वजूद की आखिरी लड़ाई लड़ रही है। जिस नदी ने पीढ़ियों की प्यास बुझाई, आज रेत माफिया उसकी छाती को छलनी कर उसे ‘शमशान’ बनाने पर तुले हैं। विडंबना देखिए, शहर के सीने पर माफिया का हलक गूंज रहा है और रक्षक बने बैठे जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं।

सीसीटीवी कैमरे या सफेद हाथी? – ​नगर का हृदय स्थल ‘जय स्तम्भ चौक’… यहाँ पुलिस की पैनी नजर होने का दावा करने वाले सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लेकिन इन्हीं कैमरों की जद से रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर अवैध रेत लेकर सीना तानकर गुजरते हैं।

  • सवाल यह है : क्या इन कैमरों के पीछे बैठा अमला अंधा हो चुका है?
  • सवाल यह भी : क्या माफिया के रसूख के आगे प्रशासन के नियम-कानून घुटने टेक चुके हैं?

दिनदहाड़े डकैती, कराह रही है प्रकृति – स्थानीय निवासियों का आक्रोश अब फटने को तैयार है। लोगों का कहना है कि अब चोरी छिपकर नहीं, बल्कि डकैती की तरह सरेआम हो रही है।

“ट्रैक्टरों के शोर से रात की नींद हराम है और दिन के उजाले में हमारी नदी को लूटा जा रहा है। प्रशासन को न चीखें सुनाई दे रही हैं, न रेत से लदी ट्रॉली दिखाई दे रही है।” – एक पीड़ित ग्रामीण

पर्यावरण पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ – ​रेत के इस अवैध कारोबार ने प्रकृति के साथ ऐसा खिलवाड़ किया है जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा:

  • जल स्तर का पाताल में जाना: नदी सूखने से भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर गया है।
  • अस्तित्व पर संकट: प्राकृतिक प्रवाह रुकने से कुरकुट नदी अब एक नाले में तब्दील होने की कगार पर है।
  • भविष्य का अकाल: यदि यही हाल रहा, तो घरघोड़ा में जल संकट का ऐसा तांडव मचेगा जिसे रोकना नामुमकिन होगा।

तीखे सवाल : जवाब कौन देगा?

  • खनिज विभाग का मौन : क्या विभाग के अफसरों और माफिया के बीच कोई ‘गुपचुप’ सांठगांठ है?
  • पुलिस का पहरा : जय स्तम्भ चौक पर तैनात रहने वाली पुलिस को क्या ये ट्रैक्टर नजर नहीं आते?
  • संरक्षण का खेल : माफिया को किसका वरदहस्त प्राप्त है कि उन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं?

जिला प्रशासन और खनिज विभाग की चुप्पी कई बड़े संदेहों को जन्म दे रही है। यदि वक्त रहते इन ‘लुटेरों’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो कुरकुट नदी सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज रह जाएगी। जनता अब कार्रवाई नहीं, ‘नतीजे’ चाहती है।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है, या फिर नदी की अंतिम सांस टूटने का इंतजार किया जा रहा है?…

पूर्व में प्रकाशित खबर :

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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