रायपुर

सीजी पुलिस भर्ती : कल्लूरी की ‘अदालत’ में दावों की अग्निपरीक्षा, अब ‘वेटिंग लिस्ट’ पर टिकी 7 लाख युवाओं की नजर…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 5,967 आरक्षक पदों पर भर्ती का परिणाम आने के बाद शुरू हुआ विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां अभ्यर्थियों का आक्रोश ‘धांधली’ के आरोपों के साथ राजधानी की सड़कों पर उतरा, वहीं दूसरी ओर सरकार ने पारदर्शिता का हवाला देते हुए मोर्चा संभाल लिया है।

जब ‘घेराव’ बना ‘संवाद’ – रायपुर की सड़कों पर नजारा तब तनावपूर्ण हो गया जब सैकड़ों अभ्यर्थी गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव करने पहुंचे।

  • अभूतपूर्व पहल : सुरक्षा घेरे और नारेबाजी के बीच गृहमंत्री ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद बंगले के गेट पर दस्तक दी।
  • सीधी बात : वे प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच जमीन पर बैठ गए। युवाओं की आंखों में भविष्य की चिंता थी और मंत्री के पास ‘नियमों की किताब’। घंटों चली समझाइश के बाद प्रतिनिधिमंडल चर्चा के लिए तैयार हुआ।

पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा के नतीजों को लेकर मचा बवाल अब सड़क से निकलकर दस्तावेजों की जांच तक पहुंच गया है। 19 और 20 दिसंबर को एडीजी (ADG) एसआरपी कल्लूरी की मौजूदगी में हुई जनसुनवाई के बाद विभाग अब अंतिम निराकरण की ओर बढ़ रहा है। आज 21 दिसंबर की सुबह प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों के बीच केवल एक ही सवाल तैर रहा है – “क्या नतीजे बदलेंगे या नई सूची आएगी?”

दो दिनों का ‘दस्तावेजी दंगल’ : पिछले दो दिनों में रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में भारी गहमागहमी रही। प्रदेश भर से पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।

  • साक्ष्यों की जांच : ADG कल्लूरी ने खुद एक-एक अभ्यर्थी से बात की। विभाग का रुख सख्त लेकिन स्पष्ट था – “शिकायत है तो प्रमाण दीजिए।”
  • मुख्य बिंदु : सबसे ज्यादा शिकायतें ‘एक ही अभ्यर्थी का नाम 4-5 जिलों में होने’ और ‘कट-ऑफ’ के संशय को लेकर आईं।

विभाग का ‘किलर’ तर्क : एक नाम, एक पद – सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विभाग ने साफ किया कि मेरिट लिस्ट में नामों का दोहराव ‘गड़बड़ी’ नहीं बल्कि ‘प्रक्रिया’ का हिस्सा है।

  • मैपिंग सिस्टम : चूंकि अभ्यर्थियों ने अलग-अलग जिलों में शारीरिक दक्षता परीक्षा दी थी, इसलिए उनके लिखित परीक्षा के अंक स्वतः ही उन सभी जिलों में मैप हो गए।
  • वेटिंग लिस्ट ही समाधान : विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जैसे ही एक अभ्यर्थी किसी एक जिले को चुनेगा, उसके बाकी जिलों की सीटें ‘सेकेंड मेरिट’ या ‘वेटिंग लिस्ट’ से तत्काल भर दी जाएंगी। यानी, पद खाली नहीं रहेंगे।

‘पारदर्शिता का पावर प्ले’ : ऑनलाइन पोर्टल और अंक – आज 21 दिसंबर को भी अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट पर अपने और दूसरों के अंक देख रहे हैं। सरकार ने जिस QR कोड और ‘पब्लिक रिजल्ट’ की नीति को अपनाया है, उसने विपक्ष के कई तीखे हमलों की धार कुंद कर दी है। हालांकि, तकनीकी त्रुटियों को लेकर अब भी कुछ छात्र आश्वस्त नहीं हैं।

कल्लूरी की रिपोर्ट और सरकार का अगला कदम – आज 21 दिसंबर को पुलिस मुख्यालय शिकायतों का अंतिम विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप सकता है।

  • संभावित बदलाव : यदि किसी भी स्तर पर डेटा एंट्री में मानवीय त्रुटि पाई गई है, तो उन चुनिंदा सीटों पर संशोधित सूची जारी की जा सकती है।
  • भर्ती का भविष्य : गृहमंत्री विजय शर्मा पहले ही कह चुके हैं कि सरकार युवाओं के साथ है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ‘वेटिंग लिस्ट’ कब जारी होती है और जॉइनिंग की प्रक्रिया कब शुरू होती है।

खबर का ‘पंच’ : राजनीति या पारदर्शी भर्ती? – छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती 2024 अब एक उदाहरण बनने जा रही है। यदि सरकार सफलतापूर्वक इन 5,967 पदों को बिना कानूनी अड़चन के भर लेती है, तो यह आगामी परीक्षाओं के लिए ‘मॉडल’ बनेगा। लेकिन यदि अभ्यर्थी एडीजी की सुनवाई से संतुष्ट नहीं हुए, तो यह मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक जा सकता है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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