बिलासपुर : भारी जन-विरोध के आगे झुका प्रशासन, मोपका-सेंदरी बायपास पर ई-चालान का ‘खेल’ बंद…

बिलासपुर। न्यायधानी के मोपका-सेंदरी बायपास पर पिछले काफी समय से ई-चालान के नाम पर चल रही ‘वसूली’ पर आखिरकार विराम लग गया है। खराब सड़क और धूल के गुबार के बीच ग्रामीणों पर थोपे जा रहे भारी-भरकम जुर्माने के खिलाफ कांग्रेस के कड़े रुख ने परिवहन विभाग (RTO) को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी की चेतावनी के बाद विभाग ने ट्रैफिक कैमरों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।
क्या था पूरा विवाद? – मोपका से सेंदरी तक बना बायपास मार्ग वर्तमान में बदहाली के आंसू रो रहा है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं और निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण उड़ती धूल ने राहगीरों का जीना मुहाल कर रखा है। विडंबना यह थी कि प्रशासन ने सड़क सुधारने के बजाय वहां हाई-टेक ट्रैफिक कैमरे लगा दिए थे।
इन कैमरों के जरिए ग्रामीण इलाकों से आने वाले किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के हजारों रुपये के चालान काटे जा रहे थे। कई ग्रामीणों को तो तब पता चला जब उनके घर पर डाक के जरिए भारी-भरकम जुर्माने की नोटिस पहुंची।
विजय केशरवानी की ‘स्ट्राइक’ और आंदोलन की चेतावनी : ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विजय केशरवानी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने RTO को पत्र लिखकर कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज कराई।
”एक तरफ सड़क चलने लायक नहीं है, दूसरी तरफ सरकार ग्रामीणों की जेब काटने में लगी है। जब तक सड़क का निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक ई-चालान की यह मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” – विजय केशरवानी
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि तत्काल प्रभाव से इन कैमरों को बंद नहीं किया गया, तो कांग्रेस ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी और चक्काजाम किया जाएगा।
विभाग का फैसला : राहत की सांस – राजनीतिक दबाव और जन-आक्रोश को भांपते हुए RTO ने त्वरित निर्णय लिया और बायपास पर लगे कैमरों को फिलहाल ‘ऑफ’ कर दिया है। इस फैसले से मोपका, सेंदरी और आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है।
मुख्य बिंदु जो चर्चा में रहे :
- सड़क की बदहाली: निर्माण अधूरा होने के बावजूद चालान की सख्ती पर सवाल।
- आर्थिक बोझ: ग्रामीण आबादी पर अचानक गिरे ई-चालान के बोझ से नाराजगी।
- विपक्ष की सक्रियता: कांग्रेस द्वारा सड़क की लड़ाई लड़ने के बाद प्रशासन का बैकफुट पर आना।
आगे क्या? – अब ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों की नजर इस बात पर है कि शासन इस सड़क का निर्माण कार्य कब पूरा करता है। विजय केशरवानी ने साफ किया है कि उनकी नजर सड़क निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा पर बनी रहेगी।




