“गर्दन पर चाकू, 3 घंटे बंधक और 25 लाख की फिरौती: सुकमा DSP पर हमले की कहानी, किसी वेब सीरीज से भी ज्यादा खौफनाक!…”

दंतेवाड़ा। अपडेट : सुकमा जिले के जगरगुण्डा में पदस्थ SDOP (DSP) तोमेश वर्मा पर हुआ हमला महज एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि तीन घंटे तक चला एक खौफनाक ‘मौत का खेल’ था। एफआईआर (0130/2025) के चौंकाने वाले तथ्यों के मुताबिक, DSP को पहले उनकी ही गाड़ी में बंधक बनाया गया, फिर 25 लाख की डिमांड की गई और अंत में गर्दन रेतने की कोशिश हुई।
बातचीत का बहाना और 3 घंटे का ‘बंधक’ ड्रामा : एफआईआर के अनुसार, मुख्य आरोपी रजनीशा वर्मा ने साजिश के तहत DSP को फोन किया। उसने कोर्ट केस में ‘बीच का रास्ता’ निकालने और समझौता करने के बहाने DSP को दंतेवाड़ा बुलाया।
- खौफनाक सफर : सुबह 11 बजे रजनीशा DSP की सरकारी स्कॉर्पियो (CG 18 N 0570) में बैठी और गीदम रोड की ओर बढ़ते ही उसने DSP की कमर पर चाकू अड़ा दिया।
- 25 लाख की फिरौती : महिला ने 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक DSP को उनकी ही गाड़ी में चाकू की नोक पर बंधक बनाकर रखा और 25 लाख रुपये की मांग की। उसने धमकी दी कि या तो वह उन्हें मार देगी या खुद की नस काटकर उन्हें जेल भिजवा देगी।
रिटायर्ड फौजी की एंट्री : ‘किलर एग्जीक्यूशन’ – जब गाड़ी टीवीएस शोरूम (आंवराभाटा) के पास रुकी, तब साजिश का दूसरा हिस्सा शुरू हुआ।
- घात लगाकर हमला : पहले से वहां मौजूद रिटायर्ड फौजी रविशंकर साहू अचानक गाड़ी के पास पहुंचा।
- जानलेवा वार : रविशंकर ने गाड़ी का दरवाजा खोला और सीधे DSP की गर्दन पर चाकू से वार किया। DSP ने अंतिम क्षणों में सिर घुमाया, जिससे वार गर्दन की मुख्य नस के बजाय ठुड्डी के पास लगा। इसके बाद आरोपी ने उनके पेट में भी चाकू घोंपने की कोशिश की।
रक्षक का पराक्रम : लहूलुहान होकर भी अपराधी को दबोचा – गर्दन और चेहरे से बहते खून के बावजूद, DSP तोमेश वर्मा ने अपना ‘खाकी’ का धर्म निभाया। उन्होंने भागने के बजाय अपनी पूरी ताकत झोंक दी और हमलावर रविशंकर साहू को पकड़ लिया। मौके पर मौजूद राहगीरों ने जब खून से लथपथ अफसर को अकेले संघर्ष करते देखा, तब उन्होंने मदद की और दोनों आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया।

कानूनी धाराएं : अपराध की गंभीरता का प्रमाण – दंतेवाड़ा पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अत्यंत कड़ी धाराएं लगाई हैं :

विशेष संपादकीय विश्लेषण : वर्दी पर ‘इंटरनल’ और ‘एक्सटर्नल’ अटैक – यह मामला एक बड़ा सवाल छोड़ता है – क्या एक पुलिस अधिकारी सुरक्षित है?
- साजिश की गहराई : आरोपी रजनीशा वर्मा और रविशंकर साहू दोनों दुर्ग के रहने वाले हैं। दुर्ग से दंतेवाड़ा तक का सफर, लगातार फोन कॉल्स और फिरौती की मांग यह साबित करती है कि यह ‘हनीट्रैप’ और ‘ब्लैकमेलिंग’ का एक चरम रूप था।
- फौजी का पतन : एक पूर्व सैनिक का इस्तेमाल ‘हिटमैन’ के तौर पर करना इस केस का सबसे काला पहलू है।
- सिस्टम के लिए सबक : कोर्ट के काम से आए एक अधिकारी को बीच शहर में बंधक बना लिया गया और 3 घंटे तक वह चाकू की नोक पर रहे। यह स्थानीय पुलिसिंग और सुरक्षा ग्रिड की विफलता को भी दर्शाता है।
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