बिलासपुर

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : “प्रशासनिक तंत्र पंगु या उदासीन?”, मुख्य सचिव से मांगा जवाब…जाने पूरा मामला…

बिलासपुर। बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर अवैध ढाबों और शराब दुकानों के अतिक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति सख्त नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने इसे ‘प्रशासनिक उदासीनता’ का चरम बताते हुए मुख्य सचिव (Chief Secretary) को व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करने का आदेश दिया है।

मामले की मुख्य बातें : क्यों भड़का हाईकोर्ट? – ​हाईकोर्ट की नाराजगी की मुख्य वजह आदेशों और सरकारी शपथ पत्रों के बावजूद जमीन पर कोई कार्रवाई न होना है।

  • खोखले निकले वादे : 25 जून 2025 को परिवहन सचिव ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर दावा किया था कि सरगांव स्थित अवैध ढाबे को बेदखल कर दिया जाएगा। ढाबा संचालक ने भी दो महीने में जगह खाली करने का लिखित भरोसा दिया था, लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
  • शराब दुकान का टालमटोल : नगर पंचायत सरगांव में नेशनल हाईवे के किनारे स्थित शराब दुकान को जन सुरक्षा के मद्देनजर शिफ्ट किया जाना था, लेकिन सरकार केवल ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल खेलती रही।
  • कोर्ट कमिश्नर का पर्दाफाश : 16 दिसंबर को कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट ने शासन के दावों की पोल खोल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि जमीनी स्तर पर एक इंच भी बदलाव नहीं हुआ है।

“असहाय नजर आ रहे सचिव” – ​सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि परिवहन विभाग के सचिव अपने ही द्वारा दिए गए आश्वासनों को लागू करने में ‘असहाय’ हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब तहसीलदार बेदखली का आदेश दे चुके हैं और संचालक शपथ पत्र दे चुका है, तो आखिर वह कौन सी ‘अदृश्य शक्ति’ है जो कार्रवाई रोक रही है?

“आदेश और शपथ पत्र के बावजूद कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि प्रशासन को न्यायिक आदेशों की कोई परवाह नहीं है।” – डिवीजन बेंच

आगे क्या? 19 दिसंबर को होगी अग्निपरीक्षा – ​हाईकोर्ट ने अब सीधे राज्य के मुख्य सचिव को कमान सौंपी है। उन्हें शपथ पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि:

  • ​अब तक हाईकोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं हुआ?
  • ​दोषी अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
  • ​अतिक्रमण हटाने की ठोस समय-सीमा क्या है?

​मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर को होनी है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी हुई है। नेशनल हाईवे पर सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट का यह रुख आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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