रायपुर

न्याय की गुहार या सियासी रार? नेशनल हेराल्ड केस पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का व्यापक शक्ति प्रदर्शन…

रायपुर। नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल ला दिया है। प्रदेश के प्रमुख जिलों – दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, और अंबिकापुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘सत्यमेव जयते’ के उद्घोष के साथ भाजपा कार्यालयों का घेराव किया। यह प्रदर्शन केवल एक कानूनी मामले का विरोध नहीं, बल्कि वैचारिक और राजनीतिक वर्चस्व की एक बड़ी जंग के रूप में उभर कर सामने आया है।

मैदानी संघर्ष : सुरक्षा घेरों और नारों के बीच का टकराव – प्रदर्शन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुर्ग में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरे। शनिचरी बाजार के पास पुलिस की पहली लेयर की बैरिकेडिंग टूटने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। यही स्थिति बिलासपुर और रायगढ़ में भी देखी गई, जहाँ पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी ‘झूमाझटकी’ हुई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों को ‘राजनीतिक हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर रही है।

भूपेश बघेल का प्रहार : विचारधारा की लड़ाई – पूर्व मुख्यमंत्री ने इस विरोध को गांधीवादी मूल्यों से जोड़ते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “भाजपा की राह असत्य और हिंसा की है। वे गांधी के हत्यारे की विचारधारा के पोषक हैं और इसीलिए वे कभी ‘सत्यमेव जयते’ का सही अर्थ नहीं समझ सकते।” बघेल ने जोर देकर कहा कि 12 वर्षों के ‘दुष्प्रचार’ के बावजूद अंततः जीत सत्य की ही होगी।

कानूनी विवाद : ₹2000 करोड़ की संपत्ति और ₹50 लाख का सौदा – इस पूरे विवाद की जड़ 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर की गई याचिका में है।

  • मुख्य आरोप : यह आरोप लगाया गया कि ‘यंग इंडियन लिमिटेड’ के माध्यम से ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (AJL) का अवैध अधिग्रहण कर ₹2000 करोड़ की संपत्ति को मात्र ₹50 लाख में नियंत्रित किया गया।
  • ताजा घटनाक्रम : अप्रैल 2025 में ईडी ने ₹661 करोड़ की संपत्ति को कब्जे में लेने का नोटिस जारी किया है, जिससे कांग्रेस के भीतर आक्रोश की नई लहर पैदा हुई है।

भाजपा का रुख : “भ्रष्टाचार पर कार्रवाई से डर रही कांग्रेस” – वहीं, भाजपा ने इन प्रदर्शनों को ‘भ्रष्टाचार के पक्ष में किया गया प्रलाप’ बताया है। भाजपा नेतृत्व का तर्क है कि यदि कोई अनियमितता नहीं हुई है, तो कांग्रेस नेताओं को न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। भाजपा के अनुसार, यह जांच किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन और संस्थाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है।

लोकतंत्र में विरोध और मर्यादा : छत्तीसगढ़ में आज जो तस्वीरें सामने आईं, वे लोकतंत्र के दो पहलुओं को दर्शाती हैं। एक तरफ विपक्ष का अपनी आवाज बुलंद करने का अधिकार है, तो दूसरी तरफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों की अपनी प्रक्रिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेश बघेल द्वारा ‘गांधी बनाम गोडसे’ का नैरेटिव सेट करना, इस कानूनी लड़ाई को पूरी तरह से भावनात्मक और वैचारिक मोड़ देने की कोशिश है। वहीं, पुलिस के साथ हुई झड़पें दर्शाती हैं कि आगामी समय में प्रदेश की राजनीति और अधिक आक्रामक होने वाली है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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