ब्रेकिंग न्यूज़ : कंवर समाज के ‘स्वाभिमान’ पर चोट, पूरे छत्तीसगढ़ में आक्रोश का विस्फोट!…

• निलंबित वनकर्मी शेखर सिंह की ‘नीचता’ पर उबला आदिवासी समाज; पूर्व गृहमंत्री और विधायकों को दी थी भद्दी गालियां, अब सलाखों के पीछे जाने की तैयारी।…
कोरबा/रायपुर: छत्तीसगढ़ के शांत माने जाने वाले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में एक बार फिर असंतोष की ज्वाला भड़क उठी है। वन विभाग के निलंबित और विवादित कर्मचारी शेखर सिंह द्वारा सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) पर आदिवासी कंवर समाज के शीर्ष नेताओं और समाज के खिलाफ की गई बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी ने पूरे प्रदेश में बवाल मचा दिया है।

क्या है पूरा मामला? (The Incident) : सोशल मीडिया पर ‘रील’ बनाने के नशे में चूर निलंबित वनकर्मी शेखर सिंह ने अपनी हदों को पार करते हुए कंवर समाज के उन दिग्गजों को निशाना बनाया, जो समाज की रीढ़ माने जाते हैं। वायरल पोस्ट में शेखर सिंह ने :
- पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर
- पूर्व विधायक बोधराम कंवर
- विधायक पुरुषोत्तम कंवर
- श्यामलाल कंवर
जैसे सम्मानित नेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। यह हमला केवल नेताओं पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कंवर समाज की अस्मिता और पगड़ी पर हमला माना जा रहा है।
सड़कों पर उतरा समाज, थानों का घेराव (The Outrage) : इस पोस्ट के वायरल होते ही कोरबा से लेकर पूरे प्रदेश में कंवर समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
- बांकीमोगरा में FIR : समाज के भारी दबाव और प्रदर्शन के बाद कोरबा जिले के बांकीमोगरा थाने में आरोपी शेखर सिंह के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है।
- धाराओं का शिकंजा : सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IT एक्ट और संभवत : SC/ST एट्रोसिटी एक्ट (अत्याचार निवारण अधिनियम) के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
- अल्टीमेटम : कंवर समाज के युवा प्रकोष्ठ और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है – “अगर शेखर सिंह की तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
प्रशासन हाई अलर्ट पर : आरोपी शेखर सिंह, जो पहले से ही अपने कारनामों के चलते वन विभाग से निलंबित चल रहा है, की इस हरकत ने कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
- इंटेलिजेंस सक्रिय : पुलिस मुख्यालय ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए ‘हाई अलर्ट’ पर रहने के निर्देश दिए हैं।
- गिरफ्तारी के लिए दबिश : पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
समाज की हुंकार : कंवर समाज के प्रतिनिधियों का कहना है, “हम अपने नेताओं और समाज का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। एक निलंबित कर्मचारी की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि वह हमारे पूर्वजों और नेताओं पर कीचड़ उछाले? यह लड़ाई अब अंजाम तक जाएगी।”
शेखर सिंह का यह “दुस्साहस” अब उसके गले की फांस बन चुका है। एक तरफ कानूनी शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी तरफ सामाजिक बहिष्कार और आक्रोश की आग उसे घेर चुकी है। अब देखना यह है कि पुलिस उसे कब तक सलाखों के पीछे भेज पाती है।




