एक्सक्लूसिव : सिस्टम का ‘लाडला’ या बलरामपुर का ‘डॉन’? राष्ट्रपति के नाम खत ने खोली मग्गू सेठ के ‘काले साम्राज्य’ की पोल…

बलरामपुर। क्या छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में कानून का राज खत्म हो चुका है? क्या यहाँ पुलिस और प्रशासन एक ऐसे हिस्ट्रीशीटर के सामने नतमस्तक हैं जिस पर हत्या, अपहरण और बलवा जैसे दर्जनों गंभीर मुकदमे दर्ज हैं? यह सवाल एक “व्यंग्यात्मक शिकायत पत्र” ने खड़ा किया है, जो पत्रकार जितेन्द्र कुमार जायसवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है।
आदिवासियों की जमीन पर ‘बेनामी’ डाका : इस पत्र में विनोद अग्रवाल उर्फ ‘मग्गू सेठ’ को व्यंग्य में ‘महान पुण्यात्मा’ और ‘कलयुगी मसीहा’ बताते हुए प्रशासन की मिलीभगत की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं।
दस्तावेजों से सबसे बड़ा खुलासा आदिवासियों की जमीन हड़पने का हुआ है। आरोप है कि मग्गू सेठ, जो सामान्य वर्ग से आते हैं, कमला देवी (पति रीझन, जाति नगेशिया) नामक आदिवासी महिला को मोहरा बनाकर बेनामी संपत्ति खरीद रहे हैं।
- पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों में ग्राम भेस्की, लोंदरा और राजपुर के दर्जनों खसरा नंबरों की सूची है, जिनमें हेक्टेअर की हेक्टेअर जमीन कमला देवी के नाम पर दर्ज दिखाई गई है।
- आरोप है कि ‘पहाड़ी कोरवा’ और ‘पंडो’ जैसी संरक्षित जनजातियों (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र) की जमीनों को सुनियोजित तरीके से हड़पा जा रहा है।
‘मौत का क्रशर’ और सबूतों का हवन : रिपोर्ट में मग्गू सेठ के क्रशर संचालन को लेकर रोंगटे खड़े करने वाले दावे किए गए हैं:
- आदिवासी की मौत : वर्ष 2022 में बरियों निवासी आदिवासी युवक शिव नारायण की मौत मग्गू सेठ के क्रशर में हुई थी। पत्र में तंज कसते हुए लिखा गया है कि पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया, जबकि यह कार्यस्थल पर लापरवाही का मामला था।
- दफ्तर में आगजनी : आरोप है कि खनिज विभाग के करोड़ों के घोटाले को छिपाने के लिए मग्गू सेठ ने अधिकारियों की मिलीभगत से बलरामपुर खनिज विभाग के दफ्तर को ही आग के हवाले करवा दिया, ताकि सारे सबूत जलकर खाक हो जाएं।
- इसके बावजूद, सील किए गए ‘महामाया स्टोन क्रशर’ को प्रशासन की मेहरबानी से दोबारा चालू कर दिया गया है।
‘फरारी’ में दावत: पुलिस को खुली चुनौती : पुलिसिया तंत्र की लाचारी का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मग्गू सेठ और उनका भाई प्रवीण अग्रवाल कागजों में “फरार” हैं, लेकिन हकीकत में वे जून/जुलाई 2025 में अपने घर पर भव्य शादी की सालगिरह मनाते हैं।
- पत्रकार ने तंज कसते हुए लिखा है कि पुलिस इन “इनामी अपराधियों” को देश-विदेश में ढूंढने का नाटक करती है, जबकि वे घर में दावत उड़ाते हैं।
- इसे पुलिस और अपराधी के बीच का ‘अटूट प्रेम’ बताया गया है।
मग्गू सेठ की ‘क्राइम कुंडली’ (2009-2021) – दस्तावेजों में मग्गू सेठ का लंबा आपराधिक इतिहास (History Sheet) संलग्न है, जो साबित करता है कि वह कोई समाजसेवी नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी है। राजपुर थाना और बरियों चौकी में दर्ज प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:
- गैर-इरादतन हत्या (2020): धारा 304 (II) और 287 – लापरवाही से मृत्यु।
- अपहरण (2015): धारा 365, 342 – अपहरण और बंधक बनाना।
- SC/ST एक्ट (2017): आदिवासियों पर अत्याचार और घर में घुसपैठ।
- अन्य अपराध: बलवा (147, 148), मारपीट (323), और धमकी (506) के दर्जनों मामले 2009 से लगातार दर्ज हैं।
“राजा राज करेगा और जुल्म बार-बार करेगा” – शिकायतकर्ता ने अंत में प्रशासन को चुनौती देते हुए लिखा है कि अगर मग्गू सेठ पर कार्रवाई नहीं हो सकती, तो पीड़ित आदिवासियों और पत्रकारों को ही जेल भेज दिया जाए। यह पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के “कानून के राज” पर एक जोरदार तमाचा है।
बड़ा सवाल: क्या राष्ट्रपति भवन और गृह मंत्रालय इस “व्यंग्यात्मक सत्य” को समझेगा, या मग्गू सेठ का यह “जंगल राज” यूं ही चलता रहेगा?।




