बड़ी खबर : छत्तीसगढ़ में अपना घर बनाना हुआ आसान, जमीन-मकान की रजिस्ट्री दरों में भारी कटौती; जानिए नए नियमों से आपकी जेब को कितना होगा फायदा…

सारंगढ़-बिलाईगढ़/रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपना घर या जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए राज्य सरकार ने खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर रजिस्ट्री और गाइडलाइन दरों में ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं। 8 दिसंबर से लागू हुए इन नए नियमों ने रियल एस्टेट सेक्टर की पूरी गणित बदल दी है, जिससे आम आदमी को लाखों रुपये की सीधी बचत होने जा रही है।
अब ‘सुपर बिल्ट-अप’ का खेल खत्म : फ्लैट खरीदारों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। अब तक बिल्डर्स और रजीस्ट्री विभाग ‘सुपर बिल्ट-अप एरिया’ (जिसमें कॉमन एरिया भी जुड़ता था) के आधार पर पैसे वसूलते थे। नए नियम के मुताबिक, अब रजिस्ट्री केवल ‘बिल्ट-अप एरिया’ पर होगी।
इसके साथ ही, बहुमंजिला इमारतों में फ्लोर के हिसाब से भी छूट दी गई है :
- बेसमेंट और फर्स्ट फ्लोर: 10% की छूट।
- सैकंड फ्लोर और उससे ऊपर: 20% की छूट। इससे मिडिल क्लास परिवारों को फ्लैट खरीदना काफी सस्ता पड़ेगा।
जमीन की कीमतों में भारी गिरावट : करोड़ों की जमीन अब लाखों में – सरकार ने जमीन के मूल्यांकन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। पहले नजूल और डायवर्टेड जमीन का मूल्यांकन ‘वर्गमीटर’ (Square Meter) के हिसाब से होता था, जो बहुत महंगा पड़ता था। अब इसे कृषि भूमि की तरह ‘हेक्टेयर’ के हिसाब से नापा जाएगा।
- उदाहरण : रायपुर के वार्ड-28 में जो एक एकड़ जमीन पहले 78 करोड़ रुपये की आंकी जाती थी, नए नियम के बाद उसका सरकारी मूल्य गिरकर 2.4 करोड़ रुपये रह गया है। यह एक क्रांतिकारी बदलाव है।
इंक्रीमेंटल सिस्टम बंद, स्लैब सिस्टम लागू : शहरी क्षेत्रों में जटिल ‘इंक्रीमेंटल सिस्टम’ को खत्म कर दिया गया है। अब वापस पुराना और सरल ‘स्लैब सिस्टम’ लागू होगा।
- नगर निगम: 50 डिसमिल तक
- नगर पालिका: 37.5 डिसमिल तक
- नगर पंचायत: 25 डिसमिल तक इस सीमा तक की जमीनों का मूल्यांकन स्लैब दर से होगा, जिससे रजिस्ट्री कराना आसान और सस्ता होगा।
पेड़, कुएं और ट्यूबवेल का एक्स्ट्रा चार्ज खत्म : ग्रामीण इलाकों में जमीन खरीदते समय पहले उस पर लगे पेड़, कुएं या ट्यूबवेल का अलग से पैसा जुड़ता था। सरकार ने इसे पूरी तरह हटा दिया है।
- कांकेर का मामला : एक खरीददार को जमीन पर लगे 600 पेड़ों के लिए पहले 78 लाख रुपये एक्स्ट्रा टैक्स देना पड़ रहा था। नए नियम से उसे 8.58 लाख रुपये की सीधी बचत हुई है। इससे लोग अब अपने खेतों में पेड़ लगाने से डरेंगे नहीं, बल्कि पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।
कॉम्प्लेक्स में पीछे की दुकानों को फायदा : कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में मुख्य सड़क से 20 मीटर की दूरी पर स्थित दुकानों की गाइडलाइन दर में 25% की कमी की गई है। यानी अगर आपकी दुकान फ्रंट में नहीं है, तो आपको सरकारी रेट भी कम देना होगा।
सरलीकरण: 21 दरें अब सिर्फ 2 में सिमटीं : नगरीय निकायों में पहले मकानों के मूल्यांकन के लिए 21 अलग-अलग तरह की दरें थीं, जिससे भ्रष्टाचार और कन्फ्यूजन होता था। अब इसे घटाकर केवल 2 प्रकार की दरों में समेट दिया गया है।
प्रशासन का रुख : केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने जिला समितियों को निर्देश दिया है कि बढ़ी हुई दरों को लेकर जो भी शिकायतें आ रही हैं, उनका परीक्षण कर 31 दिसंबर 2025 तक संशोधित प्रस्ताव भेजें। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है – रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और मंदी झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर में जान फूंकना।
इन 4 बिंदुओं में समझें मोटा मुनाफा :
- फ्लैट : सुपर बिल्ट-अप का चार्ज नहीं लगेगा, ऊपरी मंजिलों पर 20% तक छूट।
- जमीन : वर्गमीटर की जगह हेक्टेयर में गणना, सरकारी कीमत में भारी कमी।
- ग्रामीण : पेड़-पौधों और ट्यूबवेल का एक्स्ट्रा टैक्स माफ।
- शहरी : इंक्रीमेंटल चार्ज खत्म, छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री सस्ती।




