लैलूंगा के गुरुकुल वैदिक आश्रम में अनियमितताओं का खुलासा: प्रशासन की जाँच में गंभीर कमियां आईं सामने… जाने पूरा मामला…

रायगढ़। जिले के लैलूंगा विकासखंड के अंतर्गत संचालित ‘गुरुकुल वैदिक आश्रम सलखिया’ इन दिनों विवादों के घेरे में है। जनसहयोग और दान राशि से संचालित इस निजी संस्थान पर बुजुर्गों की उपेक्षा, शिक्षा में लापरवाही और गौशाला प्रबंधन में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए रायगढ़ कलेक्टर के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम द्वारा मामले की विस्तृत जाँच की जा रही है।
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते बुजुर्ग : आश्रम में रह रहे वृद्धों की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। मीडिया और जाँच दल से चर्चा के दौरान बुजुर्गों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें लंबे समय से आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। श्रवण यंत्र की आवश्यकता होने के बावजूद उन्हें सहायता नहीं मिली, साथ ही पहनने के जूते और बिछाने की चादरें जैसी मूलभूत वस्तुएं भी फटी हुई स्थिति में मिलीं। यह स्थिति संस्थान को मिलने वाली भारी-भरकम दान राशि के प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़ा करती है।
शिक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता और विसंगतियां : आश्रम द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यों में भी बड़ी विसंगतियां उजागर हुई हैं। जाँच के दौरान पाया गया कि बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति पर है जो आधिकारिक तौर पर ‘भृत्य’ के पद पर कार्यरत है और उसी पद का वेतन प्राप्त कर रहा है। प्रबंधन द्वारा इसे शैक्षणिक अर्हता का हवाला देकर सही ठहराने की कोशिश की गई है, किंतु नियमों के विरुद्ध इस व्यवस्था को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, बच्चों के भोजन और गणवेश (यूनिफॉर्म) हेतु निर्धारित राशि के सदुपयोग पर भी पारदर्शिता का अभाव दिखा।
गौशाला प्रबंधन में लापरवाही : गौ-सेवा के नाम पर संचालित इस केंद्र में गौवंश की सुरक्षा को लेकर भी ढिलाई बरती जा रही है। गौशाला में मौजूद गायों की पहचान हेतु अनिवार्य ‘टैगिंग’ नहीं की गई है, जिससे उनके रिकॉर्ड और संख्या के सत्यापन में कठिनाई आ रही है। पशु चिकित्सा विभाग के नियमों की अनदेखी पर विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई है।
पारदर्शी जाँच की आवश्यकता : वर्तमान में एसडीएम लैलूंगा के नेतृत्व में समाज कल्याण, पशु चिकित्सा और शिक्षा विभाग की टीम दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की पड़ताल कर रही है। जाँच दल के अनुसार, प्रथम दृष्टया कई अनियमितताएं पुष्ट हुई हैं। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि सेवा और अध्यात्म के नाम पर संचालित संस्थानों में पारदर्शिता अनिवार्य है, ताकि जनमानस का विश्वास बना रहे।




