‘ग्रीन गोल्ड’ की लूट : बिलासपुर के जंगलों में तस्करों का ‘नाईट ऑपरेशन’ फेल, वन विभाग की रेड देख अंधेरे में गायब हुआ गिरोह…

बिलासपुर। जिले के हरे-भरे जंगलों में तस्करों की आरी थमने का नाम नहीं ले रही है। बेशकीमती सागौन (Teak) की लकड़ी पर माफिया की टेढ़ी नज़र गड़ चुकी है। इसका जीता-जागता सबूत मंगलवार की दरम्यानी रात कोटा-बेलगहना के जंगलों में देखने को मिला, जहाँ वन विभाग और तस्करों के बीच ‘चोर-पुलिस’ का खेल चला। हालांकि, तस्कर अंधेरे और घनी झाड़ियों का फायदा उठाकर रफूचक्कर होने में कामयाब हो गए, लेकिन वन विभाग ने उनकी ‘डिलीवरी गाड़ी’ (स्कॉर्पियो) और लाखों की लकड़ी जब्त कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
आधी रात का ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ : कोटा क्षेत्र का बेलगहना रेंज… रात का सन्नाटा और तस्करों की आहट। वन विभाग को पिछले कई दिनों से इनपुट मिल रहा था कि जंगल का सीना चीरकर सागौन की तस्करी की जा रही है। मंगलवार की रात वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम जब कक्ष क्रमांक 1202/2470 के पास पहुंची, तो वहां का नज़ारा देख उनके होश उड़ गए। मुख्य मार्ग पर एक स्कॉर्पियो संदिग्ध हालत में खड़ी थी।
टीम को देखते ही उड़े होश, झाड़ियों में घुसा दी गाड़ी : जैसे ही तस्करों की नजर गश्ती दल पर पड़ी, उनमें हड़कंप मच गया। स्कॉर्पियो के ड्राइवर ने पकड़े जाने के डर से गाड़ी को मुख्य रास्ते से हटाकर सीधे जंगल की कटीली झाड़ियों के बीच उतार दिया। वन कर्मियों ने पीछा किया, लेकिन घने जंगल और रात के अंधेरे ने तस्करों को ढाल दे दी। ड्राइवर और उसके साथी गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गए।
स्कॉर्पियो बनी ‘तिजोरी’, उगल रही ‘हरा सोना’ : जब वन अमले ने झाड़ियों में छिपी लावारिस स्कॉर्पियो की तलाशी ली, तो तस्करी का पूरा सच सामने आ गया।
- गाड़ी के अंदर : 6 नग सागौन के लट्ठे और 1 विशाल सिलपट ठूंस-ठूंस कर भरा गया था।
- गाड़ी के बाहर : सर्चिंग के दौरान पास ही 3 और लट्ठे बरामद हुए।
कुल मिलाकर, तस्करों की इस गाड़ी से 30 हजार रुपए की लकड़ी और तस्करी में इस्तेमाल 2 लाख रुपए की गाड़ी जब्त की गई है। सारे माल को बेलगहना डिपो में सील कर दिया गया है।
अब RTO के रडार पर ‘गाड़ी का मालिक’ : तस्कर भले ही भाग निकले हों, लेकिन अपनी सबसे बड़ी गलती (गाड़ी) पीछे छोड़ गए। वन विभाग ने अब जांच का गियर बदल दिया है। जब्त स्कॉर्पियो के नंबर के आधार पर परिवहन विभाग (RTO) से गाड़ी मालिक की कुंडली खंगाली जा रही है।
अधिकारियों का दावा है कि गाड़ी मालिक का नाम सामने आते ही इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश होगा। सवाल यह है कि क्या यह महज कुछ लकड़हारों का काम है या इसके पीछे किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ है? वन विभाग की टीम अब तस्करों की गर्दन तक पहुंचने के लिए जाल बिछा चुकी है।




