जशपुर

जशपुर में फिर शर्मसार हुआ ‘शिक्षा का मंदिर’ : डीएवी स्कूल में छात्राओं से ‘बैड टच’, लीपापोती में जुटा स्कूल प्रबंधन; जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला…

• ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारे के बीच जशपुर में बेटियों की सुरक्षा भगवान भरोसे, 7 दिन बाद भी डीएवी स्कूल प्रबंधन जांच के नाम पर कर रहा खानापूर्ति…

जशपुर। जिले में स्कूलों के भीतर बच्चियों की सुरक्षा अब एक गंभीर सवाल बन चुकी है। अभी सुरंगपानी और बगीचा के स्कूलों में हुई ‘बैड टच’ की घटनाओं की स्याही सूखी भी नहीं थी कि अब जिले के प्रतिष्ठित डीएवी स्कूल (DAV School), पंडरीपानी से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां कक्षा 9वीं की छात्राओं ने अपने ही स्कूल के एक शिक्षक पर ‘बैड टच’ (Bad Touch) का गंभीर आरोप लगाया है।

​हैरानी की बात यह है कि घटना को सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन कार्रवाई करने के बजाय स्कूल की ‘बदनामी’ के डर से मामले को दबाने और रफा-दफा करने (लीपापोती) में जुटा हुआ है।

क्या है पूरा मामला? – ​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डीएवी स्कूल पंडरीपानी में पढ़ने वाली 9वीं कक्षा की कुछ छात्राओं ने शिकायत की है कि स्कूल के ही एक शिक्षक द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार और ‘बैड टच’ किया गया। छात्राओं ने इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से की, लेकिन आरोप है कि सात दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी शिक्षक पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

​बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन “जांच” के नाम पर केवल कोरम पूरा कर रहा है। अंदरखाने मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है ताकि स्कूल की साख पर आंच न आए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूल की ‘इमेज’ बच्चियों की ‘अस्मिता’ से बड़ी है?

अभिभावकों में आक्रोश और डर का माहौल : जशपुर जिले में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सुरंगपानी और बगीचा के स्कूलों से भी ऐसी ही घटनाएं सामने आई थीं, जहां प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की थी। लेकिन जिस रफ़्तार से जशपुर में ये मामले बढ़ रहे हैं, उसने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

​अभिभावकों का कहना है कि जिस स्कूल को ‘विद्या का मंदिर’ कहा जाता है, अगर वहां बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो वे उन्हें पढ़ने कैसे भेजें? सरकार एक तरफ ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ का नारा देती है, लेकिन धरातल पर स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था शून्य है।

जिम्मेदारों के ‘गैर-जिम्मेदाराना’ जवाब (Version) : मामले की गंभीरता को समझने के बजाय जिम्मेदार पद पर बैठे लोग पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं:

1. प्राचार्य, राजकुमार (डीएवी स्कूल):

जब उनसे इस मामले में सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद चलता-फिरता था। उन्होंने कहा, “मैं अभी छुट्टी पर हूं, मुझे पूरी जानकारी नहीं है। आने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।” जब उनसे पूछा गया कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, तो वे उखड़ गए और बोले- “आप कैसे कह सकते हैं कि कार्रवाई नहीं की गई है?”

(सवाल: जब प्राचार्य को जानकारी ही नहीं है, तो वे कार्रवाई का दावा किस आधार पर कर रहे हैं?)

2. प्रभारी शिक्षक, शैलेश देवांगन:

जब प्रभारी शिक्षक से बात की गई, तो उन्होंने भी टाल-मटोल वाला रवैया अपनाया। उन्होंने साफ कह दिया, “मुझे इस बारे में किसी भी बात की जानकारी नहीं है।”

प्रशासन से तीखे सवाल और मांग : यह घटना चीख-चीख कर सिस्टम से सवाल पूछ रही है:

  1. कार्रवाई में देरी क्यों? 7 दिन से प्रबंधन किसका इंतजार कर रहा है?
  2. सुरक्षा ऑडिट कब होगा? जिले के सभी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच और सीसीटीवी की व्यवस्था कब दुरुस्त होगी?
  3. जागरूकता की कमी: क्या स्कूलों में ‘गुड टच-बैड टच’ को लेकर केवल खानापूर्ति हो रही है?

प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। आरोपी शिक्षक पर एफआईआर (FIR) दर्ज हो और मामले को दबाने की कोशिश करने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षा के मंदिर को मैला करने की जुर्रत न कर सके।

मामले को लेकर पार्ट 2 बहुत जल्द…

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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