बेमेतरा : ‘छत्तीसगढ़ शासन’ लिखी कार ने लगाई तालाब में डुबकी, बाहर निकला रिटायर्ड ‘रसूख’!…

• निजी वाहन पर सरकारी बोर्ड : सेवानिवृत्त PWD अधिकारी के वाहन हादसे ने उठाए प्रशासन पर गंभीर सवाल…
बेमेतरा। शहर के रिहायशी इलाके में आज एक अजीबोगरीब सड़क हादसा देखने को मिला, जिसने न केवल यातायात नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन को भी पानी में डुबो दिया। वार्ड क्रमांक 6 में लोक निर्माण विभाग (PWD) के रिटायर्ड अधिकारी निर्मल ठाकुर की निजी कार अनियंत्रित होकर सीधे तालाब में जा गिरी।
हादसे में कार आधी पानी में समा गई, लेकिन पानी के ऊपर तैरती कार की नंबर प्लेट पर लिखे ‘छत्तीसगढ़ शासन’ ने एक बार फिर वीआईपी कल्चर (VIP Culture) की पोल खोलकर रख दी है।
घटना का विवरण: बाल-बाल बचे चालक : प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के वक्त वाहन तेज गति में था और अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित तालाब में जा घुसा। गनीमत यह रही कि कार में केवल चालक सवार था, जिसने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। उसे किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई है।
जैसे ही कार पानी में गिरी, मौके पर भीड़ जमा हो गई। लोगों ने राहत की सांस ली कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन जब लोगों की नज़र गाड़ी पर लगे लाल रंग के ‘छत्तीसगढ़ शासन’ के बोर्ड पर पड़ी, तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
जांच का विषय: रिटायरमेंट के बाद भी ‘सरकार’ क्यों? – इस घटना ने बेमेतरा में एक बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी सरकारी सेवा से निवृत्त (Retired) हो चुके हैं, तो उनकी निजी गाड़ी पर ‘छत्तीसगढ़ शासन’ लिखने का क्या अधिकार है?
- नियमों का खुला उल्लंघन : मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, निजी वाहनों पर अनाधिकृत रूप से पदनाम या सरकार का नाम लिखना दंडनीय अपराध है।
- रूतबे का नशा : स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रिटायरमेंट के बाद भी अधिकारी टोल टैक्स बचाने, पुलिस चेकिंग से बचने और समाज में रूतबा झाड़ने के लिए अवैध रूप से ऐसे बोर्ड लगाकर चलते हैं।
- प्रशासन की चुप्पी : बेमेतरा में यह पहली गाड़ी नहीं है। शहर में ऐसी सैकड़ों गाड़ियां दौड़ रही हैं जिन पर पूर्व अधिकारी, नेताओं के रिश्तेदार या रसूखदार लोग ‘शासन’ लिखवाकर घूम रहे हैं। आखिर आरटीओ (RTO) और ट्रैफिक पुलिस इन पर कार्रवाई करने से क्यों कतराती है?
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी बेपरवाही : गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में वीआईपी कल्चर और सड़कों पर रसूखदारों द्वारा नियमों के उल्लंघन पर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बावजूद, बेमेतरा में ‘बोर्ड कल्चर’ खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आज का हादसा महज एक संयोग है, लेकिन अगर उस वक्त तालाब के किनारे बच्चे खेल रहे होते या कोई राहगीर होता, तो इसका जिम्मेदार कौन होता – वह रिटायर्ड अधिकारी या वह प्रशासन जिसने इस अवैध बोर्ड को अनदेखा किया?
जनता की राय : मौके पर मौजूद एक नागरिक ने कहा, “साहब लोग रिटायर हो जाते हैं पर उनकी गाड़ी से सरकार नहीं उतरती। आम आदमी अगर नंबर प्लेट का फॉन्ट भी बदल ले तो चालान कट जाता है, यहाँ पूरी गाड़ी पर सरकार लिखकर घूम रहे हैं, कोई देखने वाला नहीं।”
हादसा टल गया, लेकिन सवाल जिंदा है। क्या बेमेतरा पुलिस और आरटीओ इस मामले में केवल “हादसे” की रिपोर्ट लिखेंगे या फिर “पद के दुरुपयोग” और “मोटर व्हीकल एक्ट के उल्लंघन” का मामला भी दर्ज करेंगे? जनता अब यह देखना चाहती है कि कानून सब के लिए बराबर है या फिर ‘शासन’ लिखी गाड़ियों के लिए अलग नियम हैं।
