रायगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की ‘रीढ़’ पर प्रहार : 7 महीनों से रुका इंसेंटिव और वेतन का संकट, एनएचएम कर्मियों ने दी आंदोलन की चेतावनी…

रायगढ़, 19 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत लगभग 750 संविदा कर्मियों और 230 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के सब्र का बांध अब टूट चुका है। छत्तीसगढ़ प्रदेश एन.एच.एम. कर्मचारी संघ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को कड़ा पत्र लिखते हुए प्रशासन पर गंभीर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक उदासीनता के आरोप लगाए हैं।

करोड़ों का फंड होने के बाद भी ‘खाली हाथ’ कर्मचारी : चौकाने वाली बात यह है कि राज्य मुख्यालय से रायगढ़ जिले को 1 दिसंबर 2025 को ही 15.50 करोड़ रुपये की वित्तीय सीमा (Limit) प्राप्त हो चुकी है। इसके बावजूद, संविदा कर्मचारियों को नवंबर माह का वेतन और 5 प्रतिशत एरियर्स की राशि अब तक नहीं मिली है। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में सेवाएं दे रहे CHO को जून 2025 से लंबित इंसेंटिव का भुगतान भी नहीं किया गया है।
अवैध वसूली और संवैधानिक उल्लंघन का आरोप : कर्मचारी संघ ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 265 का उल्लंघन बताया है। संघ का कहना है कि इंसेंटिव का भुगतान न होने से उनका TDS समय पर जमा नहीं हो पा रहा है, जिससे वे आयकर रिफंड (ITR) से वंचित हो रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि बिना भुगतान के TDS रोकना “अवैध कर वसूली” के समान है।
अन्य जिलों में ‘दिवाली’, रायगढ़ में ‘सन्नाटा’ : जहाँ कोरबा और दुर्ग जैसे जिलों ने ‘रिजर्व फंड’ और ‘कंटीन्जेंसी’ के माध्यम से समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया, वहीं रायगढ़ प्रशासन पूरा फंड समय से पहले समाप्त कर देता है। हालत यह है कि शासन के निर्देशों के बावजूद एनएचएम कर्मियों की दिवाली बिना वेतन के सूनी रही।
बर्खास्त पदाधिकारियों के प्रति ‘मानसिक प्रताड़ना’ : संघ ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन बदले की भावना से काम कर रहा है। अन्य जिलों (जैसे बलौदा बाजार, कवर्धा) में बर्खास्त कर्मचारियों को भी एरियर्स मिल चुका है, लेकिन रायगढ़ में संघ की जिलाध्यक्ष सुश्री शकुंतला एक्का और श्री वैभव डियोडिया का एरियर्स जानबूझकर रोका गया है।
24 दिसंबर तक का ‘अल्टीमेटम’ : संघ ने आगामी त्यौहारों और नववर्ष का हवाला देते हुए प्रशासन को 24 दिसंबर 2025 तक की मोहलत दी है। यदि इस अवधि तक समस्त लंबित वेतन, एरियर्स और इंसेंटिव का भुगतान नहीं होता है, तो जिला संघ उग्र और कठोर आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए विवश होगा।
“जब जिले के पास 15.50 करोड़ का फंड मौजूद है, तो भुगतान रोकने का क्या औचित्य है? यह सीधे तौर पर कर्मचारियों का शोषण है और हम इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे।” – सुश्री शकुंतला एक्का, जिलाध्यक्ष, एनएचएम कर्मचारी संघ, रायगढ़




