जशपुर

जंगल में मौत का साया : जशपुर में मशरूम बीनने गई महिलाओं पर हाथी का हमला, एक की मौत – दो घायल…

जशपुर। ज़िले के बगीचा वन परिक्षेत्र के जुरगुम गांव में मंगलवार सुबह भयावह दृश्य देखने को मिला। जंगल में मशरूम बीनने गई महिलाओं पर एक आवारा हाथी ने हमला कर दिया। इस हमले में 65 वर्षीय गालो बाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य महिलाएं घायल हो गईं। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

कैसे हुआ हादसा? – सुबह करीब 10 बजे गांव की चार महिलाएं झिक्की जंगल में मशरूम बीन रही थीं। तभी अचानक हाथी सामने आ गया और महिलाओं की ओर दौड़ा।

  • गालो बाई भाग नहीं पाईं और हाथी ने उन्हें बेरहमी से कुचल डाला।
  • कमला बाई को हाथी ने सूंड से लपेटने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह वह छूट गईं। उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।
  • सुमित्रा बाई को भी हल्की चोटें लगी हैं।
  • राधी बाई पास के गड्ढे में छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहीं।

वन विभाग की कार्यवाही :घटना की जानकारी मिलते ही बगीचा रेंज की प्रभारी रेंजर लक्ष्मी कहर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया।
डीएफओ शशि कुमार के अनुसार, यह लोनर हाथी है, जो सरगुजा के सीतापुर से भटककर बगीचा क्षेत्र में आया है। परिजनों को 25 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता दी गई है, शेष मुआवजे की प्रक्रिया जारी है।

मौत का सिलसिला जारी : सिर्फ तीन दिन पहले, शनिवार को भी कुनकुरी जनपद पंचायत के कुडुकेला गांव में खुखड़ी (मशरूम) बीनकर लौट रही महिला पर हाथी ने हमला किया था। इलाज के दौरान उस महिला की भी मौत हो गई थी। लगातार हमलों ने ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और भय पैदा कर दिया है।

चेतावनी और नाराज़गी : वन विभाग ने घटना के बाद मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल में न जाने की चेतावनी दी है। मगर सवाल यही उठ रहा है कि जब हाथियों की गतिविधियों की जानकारी पहले से है, तो फिर ग्रामीणों को समय रहते सतर्क क्यों नहीं किया जाता?

बड़ा सवाल :

  • आखिर कब तक ग्रामीण हाथियों के हमलों की बलि चढ़ते रहेंगे?
  • क्या वन विभाग केवल मुआवज़ा बांटने और मुनादी कराने तक सीमित रहेगा?
  • हाथियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी और ग्रामीणों को रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम क्यों लागू नहीं किया जा रहा?

जंगल अब जशपुर के गांवों के लिए रोज़गार का साधन नहीं, मौत का मैदान बनता जा रहा है। मशरूम और लकड़ी बीनने जाने वाली महिलाओं के लिए हर कदम खतरे से खाली नहीं है। वन विभाग की लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों का खामियाजा निर्दोष ग्रामीण अपनी जान देकर चुका रहे हैं।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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