बिलासपुर में पत्रकार पर हमला, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी; FIR दर्ज…

बिलासपुर। जिले में पत्रकार पर हमले और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया है। यह घटना 28 अगस्त 2025 को सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई, जब एक दैनिक अखबार के पत्रकार शेख़ असलम पर तेज़ रफ़्तार वाहन से हमला किया गया और फिर खुलेआम धमकी दी गई। इस सनसनीख़ेज़ वारदात ने पत्रकार सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का पूरा विवरण : FIR में दर्ज शिकायत के मुताबिक, पत्रकार शेख़ असलम (उम्र 43 वर्ष) अपने निजी वाहन CG10BA2037 से दोपहर लगभग 3:15 बजे महात्मा गांधी चौक की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान सामने से तेज़ रफ़्तार वाहन क्रमांक CG04PH8457 आया और जानबूझकर उनकी गाड़ी को टक्कर मारने की कोशिश की।
जब पत्रकार ने विरोध किया तो आरोपी चालक ने न केवल गाली-गलौज शुरू कर दी बल्कि “तू ज़्यादा तेज़ गाड़ी मत चला, वरना जान से मार दूँगा” कहकर हत्या की धमकी दी।
पत्रकार का आरोप है कि आरोपी लगातार आक्रामक अंदाज़ में गाली-गलौज करता रहा और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया। घटना के तुरंत बाद उन्होंने थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई : शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी चालक के खिलाफ़ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।
आरोपी पर लगाए गए आरोप:
- धारा 281 भारतीय न्याय संहिता (लापरवाह ड्राइविंग से जन-जीवन को खतरा)
- धारा 296 भारतीय न्याय संहिता (अशांति/उपद्रव)
- धारा 351(2) भारतीय न्याय संहिता (जान से मारने की धमकी)
- मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 (खतरनाक और लापरवाह वाहन संचालन)
मामले की जांच एसआई इंद्रनाथ नायक को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जल्द हिरासत में लिया जाएगा और पूछताछ की जाएगी।
पत्रकार ने जताई गहरी चिंता : शेख़ असलम ने शिकायत में कहा कि वे एक पत्रकार हैं और रोज़ाना ड्यूटी के सिलसिले में शहर भर में घूमते रहते हैं। ऐसे में खुलेआम गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी पत्रकारों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा,
“अगर सरेआम पत्रकारों को धमकाया जाएगा तो लोकतंत्र की आवाज़ कैसे बचेगी? इस तरह की घटनाएँ हमें डराने के लिए होती हैं।”
पत्रकारों पर बढ़ते हमलों की कड़ी : यह घटना उस श्रृंखला की ताज़ा कड़ी है जिसमें पत्रकारों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में प्रदेश में कई पत्रकारों ने दबंगई और धमकियों की शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल FIR दर्ज कर पुलिस खानापूर्ति करती दिख रही है।
बड़ा सवाल: कब मिलेगी पत्रकारों को सुरक्षा?
पत्रकार सिर्फ़ ख़बरें नहीं लिखते, वे जनता की आवाज़ और लोकतंत्र का प्रहरी हैं। ऐसे में अगर उन्हें ही खुलेआम धमकियां मिलें, तो यह सिर्फ़ एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र की इस घटना ने साबित कर दिया है कि सड़क पर दबंगई और खुलेआम धमकी देने वालों के हौसले बुलंद हैं। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है।