‘शांति’ की नीलामी : नर्मदा नगर बनी अवैध व्यवसायों और ‘कार बाजार’ का अड्डा, रहवासी हलाकान, निगम मेहरबान!…

- बिलासपुर की पॉश कॉलोनी में नियमों की सरेआम उड़ रहीं धज्जियां
- खाली प्लॉटों पर व्यापारियों का कब्जा, सड़कों पर लगा जाम, रोज हो रहे विवाद
- कुंभकर्णी नींद सो रहा नगर निगम प्रशासन
बिलासपुर। सपनों का आशियाना और सुकून की जिंदगी… इसी उम्मीद के साथ लोगों ने बिलासपुर की सबसे व्यवस्थित कॉलोनियों में शुमार ‘नर्मदा नगर’ में अपना घर बनाया था। लेकिन अब यह सुकून चंद मुनाफेखोरों की भेंट चढ़ गया है। नियमों को ताक पर रखकर, शहर के इस शांत रिहायशी इलाके को ‘अवैध कमर्शियल हब’ में तब्दील कर दिया गया है। हालात ये हैं कि कॉलोनी अब कॉलोनी नहीं, बल्कि गाड़ियों का बाजार और सर्विसिंग सेंटर बन चुकी है।
सड़कों पर अवैध कब्जा, घर से निकलना हुआ मुहाल – नर्मदा नगर की जिन गलियों में कभी शांति हुआ करती थी, वहां अब सुबह से लेकर रात तक कारों की खरीद-बिक्री का शोर गूंजता है। कॉलोनी के खाली पड़े प्लॉटों और कुछ मकानों को अवैध रूप से किराए पर देकर यहां कार बाजार, एसी सर्विसिंग सेंटर, कार गैरेज और कोचिंग सेंटर जैसी दुकानें खोल दी गई हैं। बाहरी लोगों, ग्राहकों और मैकेनिकों की बेतहाशा भीड़ के कारण कॉलोनियों की सड़कें जाम रहने लगी हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय निवासियों का अपने ही घर के बाहर वाहन खड़ा करना या गली से निकलना किसी जंग से कम नहीं रह गया है।
सुरक्षा और शांति खतरे में, रोज हो रहे विवाद – अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के कारण कॉलोनी में अनजान लोगों की आवाजाही कई गुना बढ़ गई है। इससे न केवल कॉलोनी का सुरक्षित और पारिवारिक माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि रास्ता जाम होने और पार्किंग को लेकर रहवासियों और कारोबारियों के बीच आए दिन तीखे विवाद और झड़पें हो रही हैं।
विकास प्राधिकरण के नियमों का सरेआम मखौल -बिलासपुर विकास प्राधिकरण (BDA) से सालों पहले प्लॉट लेकर उन्हें खाली छोड़ देने वाले ‘तथाकथित निवेशक’ अब इन जमीनों का व्यावसायिक दोहन कर रहे हैं। नगर निगम के नियमों के अनुसार आवासीय भूमि पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि पूर्णतः गैरकानूनी है। इसके बावजूद, खुलेआम नियमों को ठेंगा दिखाते हुए यहां धड़ल्ले से व्यापार चल रहा है।
नगर निगम की खामोशी पर उठते सवाल – शहर के बीचों-बीच चल रहे इस खुले उल्लंघन पर नगर निगम प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं। रहवासियों का सीधा सवाल है कि क्या निगम अधिकारियों की मिलीभगत या अनदेखी के बिना इतनी बड़ी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो सकती हैं?
परेशान और आक्रोशित नागरिकों ने नगर निगम से तत्काल इन अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को सील करने और बंद कराने की मांग की है। यदि प्रशासन ने जल्द सख्त कदम उठाकर कॉलोनी की शांति बहाल नहीं की, तो रहवासियों का आक्रोश कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन आम जनता की परेशानी समझता है, या फिर रसूखदार कारोबारियों के आगे नतमस्तक रहता है।




