विष्णुदेव साय सरकार में ‘जीरो टॉलरेंस’ का खोखला दावा: 4.30 करोड़ के घोटाले की रिपोर्ट के बाद भी सिर्फ तबादला, क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है सरकारी संरक्षण?…

रायपुर/बलरामपुर।छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कथित ‘सुशासन’ और भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में खुलेआम धज्जियां उड़ती दिख रही हैं। शिक्षा विभाग में करीब 4.30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम वित्तीय अनियमितता की पुष्टि जांच रिपोर्ट में होने के बावजूद सरकार ने आरोपी अधिकारी पर निलंबन या जेल भेजने की कार्रवाई करने के बजाय केवल ‘तबादले’ का तोहफा देकर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की है। जनता अब सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सवाल पूछ रही है कि करोड़ों के सरकारी धन की लूट पर यह नरमी किसके इशारे पर बरती जा रही है?

जांच रिपोर्ट में गबन प्रमाणित, फिर भी FIR और निलंबन से परहेज क्यों? – बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव पर 4.30 करोड़ रुपये के वित्तीय गबन और गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। मामले में बाकायदा विभागीय जांच बैठाई गई, जांच पूरी हुई और रिपोर्ट शासन के पास पहुंची, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं का साफ उल्लेख किया गया।
कायदे से जिस मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबन, एफआईआर (FIR), ईओडब्ल्यू (EOW) या एसीबी (ACB) की जांच और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए थी, वहां सरकार का कलम केवल स्थानांतरण आदेश पर चला। क्या विष्णुदेव साय की सरकार में करोड़ों के घोटाले का दंड केवल एक जिले से दूसरे जिले में पदस्थापना बदलना रह गया है?
आदेश क्रमांक ESTB-102(1)/585/2026/20-3: कार्रवाई या सुरक्षित रास्ता? – छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय (महानदी भवन, नवा रायपुर) द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी आदेश क्रमांक ESTB-102(1)/585/2026/20-3 के तहत:
- मनीराम यादव को बलरामपुर-रामानुजगंज से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (शा.उ.मा.वि.) परसा, विकासखंड अंबिकापुर (सरगुजा) में प्राचार्य पद पर भेजा गया है।
- नरेन्द्र कुमार निरापुरे को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी से लाकर बलरामपुर का नया प्रभारी DEO बनाया गया है।
राज्यपाल के नाम से जारी इस आदेश में पूरे मामले को सामान्य ‘प्रशासनिक आधार’ बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की गई है। सवाल उठता है कि जिस अधिकारी पर 4.30 करोड़ रुपये की चपत लगाने के गंभीर आरोप फाइलों में दर्ज हैं, उसे शिक्षण संस्थान में बच्चों का भविष्य संवारने के लिए प्राचार्य बनाकर क्यों भेजा गया?
सीधे मुख्यमंत्री से तीखे सवाल – साय सरकार के इस ढुलमुल रवैये को लेकर स्थानीय जनता, शिक्षकों और राजनीतिक हल्कों में भारी आक्रोश है। लोग अब सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं:
- ‘मोदी की गारंटी’ का क्या हुआ? मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे करने वाले मुख्यमंत्री करोड़ों के इस मामले में खामोश क्यों हैं?
- तबादला सजा है या संरक्षण? जब जांच रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है, तो मनीराम यादव को निलंबित कर उनके खिलाफ गबन का आपराधिक प्रकरण दर्ज क्यों नहीं कराया गया?
- किसके दबाव में दबाई गई फाइल? 4.30 करोड़ रुपये जैसी बड़ी राशि की बंदरबांट में क्या केवल एक अधिकारी शामिल था, या फिर मंत्रालय और सत्ता के गलियारों तक तार जुड़े हैं, जिसके चलते सख्त एक्शन लेने से हाथ कांप रहे हैं?
- पैसे की वसूली कब और कैसे होगी? जनता की गाढ़ी कमाई और शिक्षा के बजट से लूटे गए 4.30 करोड़ रुपये की रिकवरी का क्या रोडमैप है?
जनता के बीच यह संदेश साफ जा रहा है कि सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाली साय सरकार में बड़े घोटालों के आरोपियों को केवल कुर्सी बदलकर बचा लिया जाता है। अगर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, निलंबन और रिकवरी के आदेश नहीं देते, तो ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा महज चुनावी जुमला साबित होकर रह जाएगा।




