रिटायरमेंट की पाई-पाई पर ‘अपने’ ने ही मारा डाका : शिक्षक के खाते से 47 लाख पार कर गेमिंग में उड़ाए, शातिर गिरफ्तार…

रायगढ़ (छत्तीसगढ़) | जीवन भर की गाढ़ी कमाई, बुढ़ापे का सहारा और सिर छुपाने के लिए जमीन खरीदने का सपना—सब कुछ उस शख्स ने निगल लिया, जिसे एक बुजुर्ग शिक्षक अपना सबसे बड़ा हमदर्द और मददगार समझते थे। कोतरारोड़ थाना क्षेत्र के ग्राम कांटाहरदी में विश्वासघात की ऐसी खौफनाक दास्तान सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। 64 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक रघुनाथ सिदार के बैंक खाते से 6 वर्षों के भीतर ₹47,05,000 पार करने वाले शातिर आरोपी छत्रपाल सिदार (34 वर्ष) को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सेवा के नाम पर बुना विश्वास का मकड़जाल – पीड़ित रघुनाथ सिदार वर्ष 2024 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2020 से ही सजातीय और ग्रामीण होने के नाते छत्रपाल सिदार ने उनके करीब आना शुरू किया। बुजुर्ग शिक्षक को बैंक के लेन-देन में परेशानी होती थी, जिसका फायदा उठाकर छत्रपाल उनका ‘आधिकारिक मददगार’ बन बैठा।
चेकबुक से पैसे निकालना हो या बैंक का कोई काम, छत्रपाल हमेशा उनके साथ साए की तरह रहता था। धीरे-धीरे उसने घर में इस कदर पैठ बना ली कि वह शिक्षक के मोबाइल फोन का भी बेरोकटोक इस्तेमाल करने लगा। इसी भरोसे की आड़ में आरोपी ने उनके मोबाइल बैंकिंग का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
रिटायरमेंट फंड पर थी गिद्ध दृष्टि, ऑनलाइन गेमिंग में फूंकी गाढ़ी कमाई – वर्ष 2024 में जब शिक्षक सेवानिवृत्त हुए, तो उनके एसबीआई (कोतरारोड़) खाते में जीपीएफ (GPF), ग्रेच्युटी और अवकाश समर्पण (Leave Encashment) की गाढ़ी कमाई जमा हुई। आरोपी छत्रपाल की नजर इसी रकम पर थी।
पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह आंखें खोलने वाला है :
- किस्तों में साफ किए 47 लाख : जनवरी 2020 से जून 2026 के बीच आरोपी ने टुकड़ों-टुकड़ों में कुल 47 लाख 5 हजार रुपये पीड़ित के खाते से अपने विभिन्न बैंक खातों (HDFC, SBI, बैंक ऑफ इंडिया, अपेक्स बैंक आदि) में ट्रांसफर कर लिए।
- ऑनलाइन गेमिंग का नशा : उड़ाई गई पूरी रकम आरोपी ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में स्वाहा कर दी।
- अलर्ट का खेल खत्म: बुजुर्ग का मोबाइल आरोपी के पास रहता था, जिससे बैंक से आने वाले ट्रांजेक्शन मैसेज और ओटीपी की भनक पीड़ित को कभी नहीं लग सकी।
जमीन की रजिस्ट्री कराने बैंक पहुंचे तो उड़े होश – बुजुर्ग शिक्षक अपने जीवन की इस अंतिम पूंजी से मकान निर्माण के लिए जमीन खरीदना चाहते थे। जब वे बैंक पहुंचे और खाते का स्टेटमेंट निकलवाया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 6 साल की मेहनत और जीवन भर की पेंशन का खाता लगभग खाली हो चुका था।
सच्चाई सामने आते ही पीड़ित ने कोतरारोड़ थाने में आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश और एडिशनल एसपी अनिल सोनी व डीएसपी उन्नति ठाकुर के सुपरविजन में थाना प्रभारी शील आदित्य सिंह ने तत्काल टीम गठित की।
पुलिस ने आरोपी छत्रपाल सिदार के खिलाफ अपराध क्रमांक 377/2026, धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर उसे कांटाहरदी से धर दबोचा। आरोपी के पास से वारदात में प्रयुक्त मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड जब्त कर उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह की दो टूक चेतावनी :
“कोई कितना भी करीबी या परिचित क्यों न हो – अपना मोबाइल, एटीएम पिन, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल कभी किसी से साझा न करें। समय-समय पर बैंक जाकर स्टेटमेंट की खुद जांच करें। डिजिटल दौर में अंधा भरोसा ही साइबर और वित्तीय अपराध की सबसे बड़ी वजह बन रहा है।”




