ABVP की रैली में स्कूली बच्चों की ‘भीड़’ जुटाने पर सियासी संग्राम : NSUI ने खोला मोर्चा, DEO पर कार्रवाई की मांग; 7 दिन का अल्टीमेटम…

- कड़कती धूप में बिना अभिभावकों की अनुमति बच्चों को सड़क पर झोंकने का आरोप; निष्पक्ष जांच न होने पर जिलाव्यापी आंदोलन की चेतावनी।…
सूरजपुर। जिले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की 5 अक्टूबर को आयोजित रैली को लेकर जिले की छात्र राजनीति में उबाल आ गया है। रैली में स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं की कथित तौर पर जबरन मौजूदगी को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने तीखा हमला बोला है। NSUI जिलाध्यक्ष आकाश साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक मशीनरी और शिक्षा विभाग की भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
“किसके आदेश पर बच्चों को बनाया गया भीड़ का हिस्सा?” – NSUI ने गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल दागा है कि जिले के विभिन्न सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों से मासूम बच्चों और कॉलेज छात्रों को राजनीतिक व संगठनात्मक कार्यक्रम में भेजने का फरमान आखिर किस स्तर से जारी हुआ? संगठन ने कलेक्टर से मांग की है कि:
- किन-किन स्कूलों और कॉलेजों से कितने विद्यार्थियों को रैली में शामिल कराया गया, इसका स्पष्ट ब्योरा सार्वजनिक हो।
- क्या बच्चों को रैली में भेजने से पहले उनके माता-पिता या अभिभावकों से कोई लिखित सहमति (Consent) ली गई थी?
- यदि सहमति नहीं थी, तो बच्चों की सुरक्षा और जीवन को जोखिम में डालने का जिम्मेदार कौन है?
कड़कती धूप में प्यास और बदइंतजामी के बीच झोंके गए छात्र – NSUI ने रैली के दौरान मानवीय पहलुओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर भी सवाल खड़े किए हैं। जिलाध्यक्ष आकाश साहू ने कहा कि चिलचिलाती धूप में घंटों बच्चों को सड़कों पर पैदल चलाया गया, जबकि उनके लिए पेयजल, चिकित्सा सुविधा (फर्स्ट एड) और विश्राम की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। संगठन का कहना है कि शैक्षणिक समय के दौरान बच्चों को राजनीतिक झंडे थमाना न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि उनके अधिकारों पर सीधा हमला है।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की भूमिका संदिग्ध, तत्काल निलंबन की मांग – ज्ञापन में जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली को सीधे कटघरे में खड़ा किया गया है। NSUI का आरोप है कि शिक्षा विभाग के मौन संरक्षण या कथित मौखिक निर्देशों के बिना इतने बड़े पैमाने पर स्कूलों से विद्यार्थियों की निकासी संभव नहीं है। संगठन ने मांग की है कि मामले की जांच कर यदि DEO या किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
7 दिन की मोहलत, वरना चक्काजाम और उग्र आंदोलन – प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए NSUI जिलाध्यक्ष आकाश साहू ने दो टूक चेतावनी दी कि छात्र हितों और बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा:
“प्रशासन सात दिनों के भीतर जांच पूरी कर दोषी अधिकारियों व संबंधित पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करे। यदि समयसीमा के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो NSUI सूरजपुर की सड़कों पर उतरकर उग्र जिलाव्यापी आंदोलन करेगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”




