गांधी जयंती पर पर्यावरण संरक्षण की मिसाल : पर्यावरण प्रेमियों और वार्डवासियों ने तालाब की सफाई कर जल संरक्षण का दिया संदेश

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के पावन अवसर पर बालोद जिले के दल्ली राजहरा स्थित नियोगी नगर (वार्ड क्रमांक 15) में जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता का प्रेरक संदेश देने के उद्देश्य से एक विशेष सफाई अभियान का आयोजन किया गया। यह अभियान पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू तथा टिकेश्वर साहू के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया।

सफाई अभियान के अंतर्गत तालाब में बिखरी गैर-जैविक सामग्रियों, जैसे—प्लास्टिक, पॉलिथीन, थर्माकोल, पुराने कपड़े और अन्य कचरे को एकत्रित कर बाहर निकाला गया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों को जल निकायों को साफ-सुथरा रखने तथा उनमें किसी भी प्रकार का अपशिष्ट न फेंकने के लिए प्रेरित किया गया। इस श्रमदान अभियान में पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू, टिकेश्वर साहू, जवाहरलाल प्रजापति, हेमशंकर साहू, जितेंद्र साहू, त्रिवेणी साहू और सोनू यादव सहित वार्ड के अनेक नागरिकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजन का मूल ध्येय जनमानस में प्राकृतिक जल निकायों के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का भाव जगाना है। तेजी से बढ़ते जल प्रदूषण और मंडराते जल संकट के दौर में स्थानीय स्तर पर तालाबों का रख-रखाव और स्वच्छता आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस पहल है।

अभियान के दौरान टिकेश्वर साहू ने बताया कि हाल ही में गणेश विसर्जन के बाद तालाब में पूजन सामग्री के साथ भारी मात्रा में प्लास्टिक, थर्माकोल और कपड़े जमा हो गए थे। उन्होंने आम जनता से आग्रह किया कि धार्मिक आस्था और परंपराओं का पालन करते हुए भी हमें अपने प्राकृतिक जल स्रोतों की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। पूजन सामग्री का विसर्जन इस तरह से किया जाना चाहिए जिससे जल दूषित न हो।

सफाई के समय जब कुछ छोटे बच्चे तालाब में नहाने आए, तब प्रदीप साहू ने उनसे आत्मीय बातचीत कर जल एवं पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व समझाया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि जल ही जीवन है और इसे बचाना संपूर्ण समाज का सामूहिक कर्तव्य है। आज के बच्चे ही कल के राष्ट्र निर्माता हैं, इसलिए उनमें बचपन से ही प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी के संस्कार डालना आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि गांधी जयंती केवल औपचारिकता न होकर स्वच्छता, श्रमदान और सामाजिक कर्तव्यों को आचरण में ढालने का अवसर है। यदि हर नागरिक अपने आसपास के सार्वजनिक स्थानों और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प ले, तो पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी वार्डवासियों ने तालाब को सदैव स्वच्छ बनाए रखने और भविष्य में जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में अपना निरंतर सहयोग देने की शपथ ली।




