
फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
रायपुर/अंतागढ़/बालोद। दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय बहुल अंचलों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। सामरिक और आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 95 किलोमीटर लंबी दल्ली राजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो गया है। इस परियोजना के अंतिम चरण के तहत ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर लंबे रेल खंड का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस नए रेल कारिडोर की शुरुआत से बस्तर और उसके आसपास के क्षेत्रों में जहां आम नागरिकों की पहुंच सुगम होगी, वहीं भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) को कच्चे माल की आपूर्ति में अभूतपूर्व तेजी और सुगमता आएगी।

बीएसपी की लौह आपूर्ति होगी आसान, घटेगी सड़क परिवहन पर निर्भरता
यह रेल परियोजना केवल आम यात्रियों की आवाजाही के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह देश के प्रमुख इस्पात उत्पादकों में से एक भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की रीढ़ साबित होगी। बीएसपी के निर्बाध और दीर्घकालिक उत्पादन के लिए लौह अयस्क (आयरन ओर) सबसे बुनियादी जरूरत है। रावघाट के विशाल लौह अयस्क भंडार तक सीधे रेल नेटवर्क स्थापित हो जाने से संयंत्र को बिना किसी बाधा के कच्चा माल मिल सकेगा।

अब तक भारी मात्रा में लौह अयस्क के परिवहन के लिए सड़क मार्ग पर अत्यधिक निर्भर रहना पड़ता था, जिससे लागत और समय दोनों अधिक लगते थे। रेल लाइन पूरी होने से बड़े पैमाने पर माल ढुलाई का एक सशक्त और सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक विकल्प उपलब्ध हो गया है। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भारी परिवहन व्यवस्था भी विकसित होगी।

जनजातीय क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक कायाकल्प
माओवाद के प्रभाव से मुक्त हो रहे दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह रेल लाइन एक नई भोर की तरह है। दल्ली राजहरा से ताड़ोकी के मध्य यात्री ट्रेन सेवाएं पहले से ही जारी थीं, किंतु अब रावघाट तक लाइन विस्तार होने से अंदरूनी जनजातीय गांव सीधे रायपुर, दुर्ग, भिलाई जैसे बड़े प्रशासनिक एवं व्यापारिक केंद्रों से जुड़ जाएंगे।

परिवहन की इस नई क्रांति से स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं के लिए शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। कृषि उपज, वनोपज और स्थानीय हस्तशिल्प को बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंचाने में अब सहूलियत होगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त, बस्तर में पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नया जीवन मिलेगा।

जन-प्रतिनिधियों और नेतृत्व ने जताई खुशी
इस ऐतिहासिक पड़ाव पर खुशी जाहिर करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह रेल कारिडोर छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा।
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने भी इस उपलब्धि को दक्षिण छत्तीसगढ़ और बस्तर संभाग के सर्वांगीण विकास के लिए एक युगांतरकारी कदम बताया। उनका मानना है कि बुनियादी ढांचे का यह विकास क्षेत्र में स्थायी शांति, समृद्धि और प्रगति का आधार बनेगा।




