गांव में 700 नीलगिरी पेड़ों की अवैध कटाई व लाखों का गबन, ग्रामीणों ने मोर्चा खोल सरपंच को पद से हटाने की उठाई मांग

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद (छत्तीसगढ़)। जिले के गुरूर विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भेजा मैदानी में भ्रष्टाचार और अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत की सरपंच कु. रूद्राणी नेताम और सचिव आमीन मंडावी ने मिलीभगत कर बिना किसी वैध अनुमति के 700 नीलगिरी वृक्षों को काटकर बेच दिया और उससे प्राप्त अनुमानित 13.85 लाख रुपये की राशि का गबन कर लिया। इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत कलेक्टर जनदर्शन समेत विभागीय अधिकारियों से की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उग्र ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां, पिता के दखल का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच कु. रूद्राणी नेताम केवल नाममात्र की जनप्रतिनिधि हैं, जबकि पंचायत के समस्त प्रशासनिक व नीतिगत फैसलों में उनके पिता मेहत्तर नेताम का सीधा हस्तक्षेप रहता है। खुद को बड़ा नेता बताने वाले मेहत्तर नेताम शासकीय नियमों को ताक पर रखकर पंचायत कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। 700 अवैध पेड़ों की कटाई और नीलगिरी की बिक्री से हासिल राशि में पिता-पुत्री की सीधी संलिप्तता का दावा किया गया है।

एसडीएम द्वारा जारी आदेश की शर्तों का घोर उल्लंघन
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गुरूर द्वारा 8 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 240-241 के तहत खसरा नंबर 10/1 में स्थित 1,635 नीलगिरी वृक्षों में से केवल 935 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी। इस अनुमति पत्र में 7 कड़ी शर्तें शामिल थीं:
- कटाई केवल सरपंच की देखरेख में होगी।
- वृक्षों की अनिवार्य फोटोग्राफी प्रस्तुत की जाएगी।
- काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले दस गुना अधिक (फलदार) पौधे वन विभाग के सहयोग से रोपे जाएंगे।
- कटाई का खर्च पंचायत वहन करेगी।
- अनुमति 6 महीने के लिए वैध रहेगी।
- स्वीकृत सीमा से अधिक पेड़ नहीं काटे जाएंगे।
- किसी भी शर्त के टूटने पर अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
इन शर्तों के बावजूद, पंचायत प्रशासन ने 935 पेड़ों की अनुमति पर पूरे 1,635 नीलगिरी के पेड़ काट डाले। 700 अतिरिक्त पेड़ों की कटाई न तो किसी टेंडर या नीलामी प्रक्रिया के तहत हुई और न ही इसके 13.85 लाख रुपये का कोई हिसाब पंचायत के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसके अलावा, एसडीएम के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद काटे गए पेड़ों के स्थान पर एक भी फलदार पौधा नहीं लगाया गया।

दोहरे मद से शासकीय धन की लूट और प्रस्ताव पंजी में कूटरचना
जांच की मांग कर रहे ग्रामीणों ने सूचना का अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के हवाले से खुलासा किया कि नीलगिरी वृक्षों की नीलामी से प्राप्त 18.50 लाख रुपये की राशि का उपयोग पौधा लगाने में किया जाना था, जिसे डकार लिया गया। उल्टे, उसी स्थान पर वृक्षारोपण के नाम पर विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) योजना मद से शासकीय निधि स्वीकृत करा ली गई, जो सीधे तौर पर दोहरे मद का उपयोग कर सरकारी धन के दुर्व्यय को दर्शाता है।
इतना ही नहीं, 18 सितंबर 2025 के प्रस्ताव पंजी में व्यापक हेरफेर, ओवरराइटिंग और कूटरचना की गई है। प्रकरण क्रमांक 05 के खाली स्थान में फर्जी तरीके से नीलगिरी नीलामी का विवरण दर्ज किया गया, जबकि वहां पहले से प्राथमिक शाला नवागांव किचन शेड मरम्मत का प्रस्ताव दर्ज था। इसके साथ ही, प्रकरण क्रमांक 06 को दो बार लिखकर फर्जीवाड़ा रचा गया, जिसमें सचिव आमीन मंडावी की स्पष्ट भूमिका नजर आती है।

15वें वित्त आयोग की राशि में भी किया गया बंदरबांट
सरपंच और सचिव पर ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर 15वें वित्त आयोग की लगभग 10 लाख रुपये की राशि का बंदरबांट करने का भी आरोप है। तय कार्ययोजना के विपरीत जाकर वित्तीय संसाधनों की व्यापक बर्बादी की गई है।
ग्रामीणों ने धारा 40 के तहत बर्खास्तगी की मांग की
एसडीएम गुरूर को प्रेषित अपने मांग पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि सरपंच कु. रूद्राणी नेताम अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में ‘अवचार’ (पद के दुरुपयोग और लोकहित के विपरीत कार्य) की दोषी हैं। उन्होंने अपने पिता को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने और पंचायत को अपूरणीय आर्थिक क्षति पहुंचाने का काम किया है। ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 (1) (क) एवं (ख) के तहत सरपंच को तत्काल प्रभाव से पद से निष्कासित करने तथा गबन की गई पूरी राशि की वसूली करने की मांग की है।




