मझवानी में 15वें वित्त के फंड पर ‘डाका’ : कागजी विकास की आड़ में लाखों का बंदरबांट, ऑडियो टेप में सचिव का सनसनीखेज कबूलनामा – ‘VIP दौरों में खपाया गांव का पैसा’…

- सरपंच-सचिव गठजोड़ पर फूटा ग्रामीणों का आक्रोश; 23 फरवरी को एक ही दिन में लाखों के भुगतान का खेल उजागर, RTI दस्तावेजों ने खोली पंचायती तंत्र की पोल।…
बिलासपुर/कोटा (छत्तीसगढ़) पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के दावों की बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत मझवानी (मंजवानी) में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 15वें वित्त आयोग की जिस राशि को ग्रामीणों के बुनियादी हक—पेयजल, स्वच्छता और सड़कों—पर खर्च किया जाना था, उस पर प्रशासनिक मिलीभगत से खुलेआम डाका डालने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) से हासिल की गई कैश बुक और पंचायत सचिव के साथ हुई बातचीत की पुख्ता ऑडियो रिकॉर्डिंग ने इस पूरे कथित भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है।
इस खेल में केवल सचिव ही नहीं, बल्कि चेक और वाउचर पर दस्तखत करने वाले सरपंच, उप-सरपंच और पूरी पंचायत बॉडी सीधे तौर पर कटघरे में खड़ी है।
ऑडियो टेप में खुला भ्रष्टाचार का राज: सचिव ने खुद खोले पर्दे के पीछे के खेल –‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज न्यूज़’ के पास सुरक्षित ऑडियो टेप में पंचायत सचिव गोस्वामी जी ने जो स्वीकारोक्तियां की हैं, वे आंखें खोलने वाली हैं:
- ‘बिना आदेश एडजस्टमेंट’ की स्वीकारोक्ति : जब वित्तीय वर्ष 2025-26 के खर्चों पर तीखे सवाल पूछे गए, तो सचिव ने साफ तौर पर माना कि कई आयोजनों का कोई प्रशासनिक या लिखित आदेश नहीं होता। उन्हें “परिस्थिति अनुसार” पंचायत के बुनियादी विकास मदों से एडजस्ट (खपाया) किया जाता है।
- VIP कार्यक्रमों का बोझ गांव के माथे : बातचीत में सचिव ने स्वीकार किया कि बिल्हा क्षेत्र में आयोजित एक रसूखदार, उच्च-स्तरीय कार्यक्रम के भारी-भरकम खर्चों की भरपाई ग्राम पंचायत के मद से बिल बनाकर की गई।
- हैंडपंप मरम्मत (वार्ड 1 व 2): ₹1,16,020
- रोड मरम्मत कार्य: ₹1,09,600
- कचरा कलेक्शन रिक्शा: ₹48,000
- वेतन एवं मानदेय: ₹42,000
- पेयजल सामग्री व संधारण: ₹24,900
- मुरमीकरण कार्य: ₹16,900
- पंचायत भवन मरम्मत: ₹5,000 से लेकर ₹17,500 की कई बैक-टू-बैक प्रविष्टियां
जमीनी हकीकत: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव में न तो उस अनुपात में सड़कें सुधरी हैं और न ही हैंडपंप ठीक हुए हैं। यह पूरा विकास धरातल पर शून्य और केवल सरकारी पन्नों पर दर्ज ‘डिजिटल और कागजी विकास’ है।
‘सरपंच के हस्ताक्षर के बिना पत्ता भी नहीं हिलता’: पूरी पंचायत घेरे में – ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस महाघोटाले का ठीकरा सिर्फ सचिव पर फोड़कर बाकी लोगों को बरी नहीं किया जा सकता। पंचायत के त्रिस्तरीय नियमों के अनुसार, हर एक आहरण और भुगतान सरपंच की सहमति और संयुक्त हस्ताक्षर से ही संभव होता है। ऐसे में सरपंच, उप-सरपंच और पंचों की चुप्पी यह साबित करती है कि यह एक संगठित बंदरबांट है, जिसमें सभी की मिलीभगत है।
ग्रामीणों का प्रशासनिक अमले को खुला अल्टीमेटम : 4 सीधी मांगें
- स्वतः संज्ञान लें उच्चाधिकारी : कलेक्टर बिलासपुर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत बिलासपुर तत्काल मामले का संज्ञान लेकर जांच दल गठित करें।
- भौतिक सत्यापन और तकनीकी ऑडिट : कैश बुक में दर्ज हर निर्माण और मरम्मत कार्य की तकनीकी टीम से जांच कराई जाए तथा जियो-टैग्ड (Geo-tagged) फोटो व वीडियोग्राफी से हकीकत परखी जाए।
- ऑडियो टेप को साक्ष्य बनाकर पूछताछ : संपादक के पास मौजूद ऑडियो रिकॉर्डिंग को प्राथमिक साक्ष्य मानते हुए सचिव, सरपंच और निर्माण एजेंसियों से कड़ी पूछताछ हो।
- रिकवरी और बर्खास्तगी : जनता के गाढ़े पसीने की पाई-पाई की रिकवरी की जाए और दोषियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर कानूनी अपराध (FIR) दर्ज किया जाए।
ग्रामवासियों ने चेताया है कि यदि जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो वे व्यापक आंदोलन को बाध्य होंगे। ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
संपादकीय रुख : हमारे पास RTI से प्राप्त दस्तावेज और सचिव के स्वीकारोक्ति वाले ऑडियो साक्ष्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। पत्रकारिता का प्राथमिक धर्म जनता के पैसे की पहरेदारी करना और सत्ता-व्यवस्था से सच के साथ जवाब मांगना है। इस संबंध में सरपंच या संबंधित जनप्रतिनिधि जब भी अपना पक्ष आधिकारिक रूप से रखेंगे, उसे भी पूरी पारदर्शिता के साथ स्थान दिया जाएगा।
(डिस्क्लेमर : यह रिपोर्ट ग्रामीणों की लिखित शिकायत, RTI दस्तावेजों और दूरभाष पर हुई बातचीत के ऑडियो साक्ष्यों के आधार पर जनहित में प्रकाशित की गई है। इसका एकमात्र उद्देश्य शासन-प्रशासन द्वारा उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना है।)



